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27 वर्षों बाद जब मिले गुरु और शिष्य… तो नम हो गईं आंखें, मुस्कुरा उठीं यादें माता-पिता के बाद गुरु का दर्जा सबसे ऊंचा… आदर्श स्कूल के पूर्व विद्यार्थियों ने गुरुजनों को दिया सम्मान, पुरानी यादों का कारवां फिर हुआ जवान

 


धमतरी शहर में रविवार का दिन भावनाओं, अपनत्व और गुरु-शिष्य परंपरा की खूबसूरत मिसाल बन गया…

करीब 27 वर्षों बाद जब आदर्श स्कूल के सन 1998 बैच के पूर्व छात्र-छात्राएं एक छत के नीचे अपने गुरुजनों से मिले, तो माहौल सिर्फ एक कार्यक्रम का नहीं, बल्कि बीते सुनहरे दौर की यादों का जश्न बन गया.... कभी स्कूल की गलियों में गूंजने वाली मासूम हंसी… क्लासरूम की शरारतें… गुरुजनों की सीख और अनुशासन… सब कुछ मानो एक पल में फिर से ज़िंदा हो उठा।

धमतरी आदर्श शिक्षण संस्थान द्वारा संचालित आदर्श स्कूल कभी शहर में उच्च शिक्षा, संस्कार और अनुशासन का एक मजबूत केंद्र माना जाता था..... यह वही विद्यालय था, जहां शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं थी, बल्कि बच्चों को बेहतर इंसान बनाने की तालीम भी दी जाती थी..... आज भले ही यह विद्यालय बंद हो चुका है, लेकिन यहां से मिले संस्कार, मोहब्बत, अदब और गुरुजनों का स्नेह आज भी हर छात्र के दिल में ज़िंदा है.... कार्यक्रम में शामिल हुए पूर्व छात्र-छात्राओं ने अपने गुरुजनों का शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया.... जैसे ही वर्षों बाद गुरु और शिष्य आमने-सामने आए, कई आंखें नम हो गईं… किसी ने अपने शिक्षक के चरण छुए… तो किसी ने पुरानी तस्वीरें देखकर बीते दिनों को याद किया....

माहौल ऐसा था, मानो वक्त कुछ देर के लिए ठहर गया हो।

इस अवसर पर विद्यार्थियों ने कहा कि —
माता-पिता हमें जीवन देते हैं, लेकिन गुरु हमें जीवन जीने की राह दिखाते हैं।
इसी भावना के साथ सभी ने अपने गुरुजनों का वंदन, पूजन और सम्मान कर उनके प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट की....

कार्यक्रम के दौरान गुरुजन भी भावुक नजर आए.....
उन्होंने कहा कि आज के दौर में भी यदि छात्र अपने शिक्षकों को इतने सम्मान और प्रेम से याद करते हैं, तो यही भारतीय संस्कृति और शिक्षा पद्धति की सबसे बड़ी खूबसूरती है।
गुरु-शिष्य का रिश्ता केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि संस्कार, विश्वास और आत्मीयता का रिश्ता होता है..... कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इसे सिर्फ एक मिलन समारोह नहीं, बल्कि संस्कारों का उत्सव बताया..... वहीं संयोग से आयोजित यह कार्यक्रम मदर्स डे के अवसर पर भी विशेष बन गया… जहां विद्यार्थियों ने अपनी शिक्षिकाओं और गुरु माताओं के प्रति भी श्रद्धा और सम्मान प्रकट किया.... इसने पूरे आयोजन को और अधिक भावनात्मक और यादगार बना दिया....

27 वर्षों बाद हुए इस मिलन ने यह साबित कर दिया कि वक्त भले गुजर जाए, लेकिन गुरु का आशीर्वाद और स्कूल की यादें कभी पुरानी नहीं होतीं…
और शायद यही रिश्ते जिंदगी को सबसे खूबसूरत बनाते हैं।



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