लगभग दो दशक तक जंगल की जिंदगी जीने के बाद, आज एक और नक्सली कहानी का अंत हो गया।
धमतरी जिले में 5 लाख रुपये की इनामी 37 वर्षीय महिला नक्सली भूमिका उर्फ़ गीता ने आज पुलिस कप्तान के सामने आत्मसमर्पण कर दिया...... बताया जा रहा है कि बीजापुर की रहने वाली भूमिका नगरी एरिया कमेटी की सदस्य और गोबरा एलओएस कमांडर के रूप में सक्रिय थी। उसका नक्सली सफर साल 2005 में शुरू हुआ था..... शुरुआती ट्रेनिंग के बाद उसने प्लाटून नंबर-1 में काम किया और फिर ओडिशा राज्य कमेटी में अपनी भूमिका निभाई..... साल 2011 से 2019 तक वह बड़े नक्सली नेता सीसीएम संग्राम की सुरक्षा गार्ड रही..... उसकी सक्रियता और वफादारी को देखते हुए संगठन ने 2023 में उसे गोबरा एलओएस कमांडर की जिम्मेदारी सौंपी थी.....
लेकिन वक्त के साथ भूमिका का दिल संगठन से उचट गया....
उसने आत्मसमर्पण के पीछे संगठन के भीतर भेदभाव, पारिवारिक जीवन से दूरी और माओवादी विचारधारा की खोखलापन को मुख्य कारण बताया...... भूमिका ने स्वीकार किया कि वह ओडिशा, बीजापुर और धमतरी जिलों में हुई कई मुठभेड़ों में शामिल रही है..... पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शासन की पुनर्वास नीति और पुलिस के बढ़ते दबाव के चलते भूमिका ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया...... आत्मसमर्पण के बाद शासन की नीति के तहत उसे 50 हजार रुपये की तत्काल प्रोत्साहन राशि दी गई है।
पुलिस अधीक्षक ने कहा —
यह आत्मसमर्पण सिर्फ एक व्यक्ति की वापसी नहीं, बल्कि एक गलत विचारधारा पर जीत है..... अब भूमिका जैसे और साथी भी समाज की ओर लौटेंगे।
धूल और बंदूक की जिंदगी छोड़कर अब भूमिका ने अमन और इंसानियत के रास्ते पर लौटने की कसम खाई है.... वही धमतरी की धरती ने एक बार फिर बगावत से वापसी की कहानी देखी है —
जहां जंगल की गूंज अब उम्मीद की आवाज़ में बदल रही है।





