नए साल की ठंडी सुबह, जब हर कोई अपनी-अपनी कामनाओं के साथ साल की नई शुरुआत कर रहा था,उसी वक्त भारतीय स्टेट बैंक, धमतरी शाखा ने इंसानियत और समाजिक सरोकार की एक अनोखी मिसाल पेश की...... बैंक ने उन नन्ही परिंदियों के लिए अपने दिल के दरवाज़े खोले, जिनके सपनों की उड़ान अकसर पैदल सफ़र की थकान में कहीं रुक जाती है....... जी हां—नए वर्ष के मौके पर बैंक ने गरीब और जरूरतमंद स्कूली बच्चियों को साइकिल वितरण कर यह संदेश दिया कि इल्म की राह मुश्किल हो सकती है, पर रुकनी नहीं चाहिए।
शाखा प्रबंधक चेतन सिंह ठाकुर ने बताया कि इस सद्भावना कार्यक्रम में शहर के विभिन्न सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को आमंत्रित किया गया था........ कार्यक्रम में बैंक द्वारा 20 साइकिलें वितरित की गईं—हर साइकिल किसी नई उम्मीद, नई मुस्कुराहट और नई मंज़िल का प्रतीक बनकर बच्चियों को सौंप दी गई..... इस मौके पर धमतरी विधायक, बैंक के अधिकारी-कर्मचारी, शिक्षकगण और कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे...... जब साइकिलें बच्चियों के हाथों में पहुंचीं, तो उनके चेहरों की मासूम मुस्कानें जैसे किसी खुशबूदार दुआ में बदल गईं..... किसी की आंखों में चमक थी—तो किसी के होंठों पर हल्की सी दुआ—
अब स्कूल तक का सफ़र आसान होगा…
यह पहल न केवल शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाती है,
बल्कि यह भी दर्शाती है कि समाज बदलने के लिए सिर्फ शब्द नहीं, कदम भी उठाने पड़ते हैं.... धमतरी में भारतीय स्टेट बैंक की यह कोशिश एक मार्मिक और प्रेरणादायक संदेश छोड़ जाती है— कि अगर हर संस्था, हर दिल इसी तरह किसी एक ज़रूरतमंद का हाथ थाम ले, तो इल्म की यह रोशनी न सिर्फ शहर बल्कि पूरे समाज को उजाला दे सकती है।





