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“लबों पे वादे, दिलों में सियासत” — न्योते, आश्वासन और अंदरखाने की तकरार… वादों से ज्यादा ‘मैं-मैं’ का शोर! धमतरी में सियासत अब सेवा नहीं, ‘श्रेय’ की दरकार!”

सियासत के इस रंगमंच पर सब कुछ उतना सीधा नहीं, जितना दिखाई देता है… यहां हर मुस्कान के पीछे एक मकसद, हर मुलाकात के पीछे एक सियासी गणित, और हर वादे के पीछे छुपी होती है श्रेय की सियासत...….

कहानी सिर्फ एक मुलाकात की नहीं है…
ये किस्सा है उस सियासी मंच का, जहां मुस्कुराहटों के पीछे तंज और वादों के पीछे क्रेडिट की जंग चल रही है....

सीएम और विभागीय मंत्री से मुलाकात हुई…
 मांगों की लंबी फेहरिस्त रखी गई
 बातचीत तफसील से हुई
 और जवाब — काम जल्द पूरा होगा…

सिर्फ इतना ही नहीं…
 धमतरी आने का न्योता भी दिया गया
 मंत्री जी ने भी मुस्कुराते हुए हामी भर दी

सुनने में सब कुछ शानदार… सब कुछ परफेक्ट…
लेकिन असली कहानी यहीं से शुरू होती है!


 सियासत का नया ट्रेंड — काम कम, श्रेय ज्यादा!

 काम कौन करवा रहा है — ये पीछे
 श्रेय कौन ले रहा है — यही सबसे बड़ा मुद्दा

वो दौर अलग था…
जब रिवायत, नीति और सिद्धांत की बात होती थी…

ये दौर अलग है ?
  काम बाद में… क्रेडिट पहले!


 ‘मैं पहले’ की होड़ — अपनों में ही टकराव

भाजपा, जो अपने रीति-नीति और सिद्धांतों के लिए जानी जाती रही…
अब उसी पार्टी के कुछ नेताओं के बीच
 “मैं पहले… मैं पहले” की होड़ मच गई है

हैरानी की बात —
 विपक्ष से ज्यादा टक्कर अब ‘अपनों’ से हो रही है

  कोई फोटो पहले डालने की जल्दी में
  कोई बयान देकर खुद को बड़ा दिखाने में
  और कोई दूसरे को छोटा दिखाकर आगे निकलने की जुगत में

 यानि सियासत अब “विकास” नहीं, “वायरल” होने की दौड़ बन चुकी है!


 जनता का तंज — चौक-चौराहों पर चर्चा

उधर, शहर की गलियों और चौक-चौराहों पर
अब जनता भी चुप नहीं है…

  लोग कह रहे हैं —
 काम तो दिख नहीं रहा… पर श्रेय लेने की रेस फुल स्पीड में चल रही है!

और मजाक भी कम नहीं —
 अगर काम का भी उतना ही कॉम्पिटिशन होता…
जितना क्रेडिट लेने का है… तो धमतरी अब तक मिनी मेट्रो बन गया होता!
 😄


 सवाल — जो उठने लगे हैं

  क्या पार्टी के सिद्धांत अब सिर्फ किताबों तक सिमट गए हैं ?
  क्या नेताओं को जनता की सोच की परवाह नहीं रही ?

क्योंकि जिस तरह से
 एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ चल रही है…

उससे साफ है —
 सियासत अब सेवा नहीं, सेल्फ-प्रमोशन का मंच बनती जा रही है।


  सबसे चौंकाने वाली बात

  न शर्म… न हया… न कोई झिझक!
  बस एक ही जिद —

  श्रेय मेरा… नाम मेरा!


 अब आगे ?

 क्या ये श्रेय युद्ध यहीं थमेगा ?
 या आने वाले दिनों में और भी तेज होगा ?

 क्योंकि…
धमतरी की जनता सब देख रही है…
और सही वक्त आने पर जवाब भी जरूर देगी!



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