शहर के विकास की गाड़ी रफ्तार पकड़ने से पहले आखिर कहां अटक रही थी ? पार्षदों की फाइलें महीनों से पेंडिंग बताई जा रही थीं… करीब आठ महीने पहले वर्कऑर्डर जारी होने के बावजूद कई काम जमीन पर शुरू नहीं हो पाए… और दूसरी तरफ मेयर रामू रोहरा लगातार शहर के 40 वार्डों में विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए प्रस्ताव, स्वीकृति और निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने की कोशिश में जुटे रहे..... अब इसी बीच नगर निगम में ऐसा फैसला हुआ है, जिसने सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है.... PWD प्रभारी विजय मोटवानी से विभाग की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है और युगल किशोर उर्फ पिंटू यादव को PWD का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.... इस बदलाव के बाद सवाल सीधा है—क्या विकास कार्यों की सुस्त रफ्तार आखिरकार विजय मोटवानी की कुर्सी पर भारी पड़ गई ?नगर निगम में PWD ऐसा विभाग है, जहां से शहर की सड़क, नाली और कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की राह निकलती है..... ऐसे में यदि इसी विभाग में फाइलें लंबे समय तक आगे न बढ़ें और वर्कऑर्डर जारी होने के महीनों बाद भी काम धरातल पर नजर न आए, तो सवाल उठना लाजिमी है...... बताया जा रहा है कई पार्षद अपनी विकास संबंधी फाइलों को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे थे.... दूसरी तरफ कुछ काम ऐसे भी बताए जा रहे हैं, जिनके वर्कऑर्डर काफी पहले जारी हो चुके हैं, लेकिन निर्माण की शुरुआत नहीं हो सकी.... ऐसे हालात में विभागीय कामकाज और तत्कालीन प्रभारी विजय मोटवानी की सक्रियता को लेकर सवाल खड़े होना शुरू हो गए थे।
मेयर एक्शन मोड में—अब इंतजार नहीं, जमीन पर चाहिए काम!
मेयर जगदीश रामू रोहरा शहर के सभी 40 वार्डों में विकास को रफ्तार देने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं.... सड़क, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए करोड़ों रुपये के प्रस्ताव शासन तक भेजे गए हैं.... ऐसे में मेयर की कोशिश जहां शहर के लिए ज्यादा से ज्यादा राशि और स्वीकृति लाने की है, वहीं सबसे बड़ी चुनौती यह भी है कि स्वीकृत काम फाइलों से निकलकर समय पर जमीन पर दिखाई दें..... यही वजह है कि PWD में हुआ यह बदलाव अब सामान्य विभागीय फेरबदल से कहीं बड़ा संदेश देता दिखाई दे रहा है—विकास में सुस्ती अब भारी पड़ सकती है.... हालांकि निगम की ओर से यदि आधिकारिक आदेश में प्रभार वापस लेने की कोई अलग वजह बताई गई है, तो वही अंतिम प्रशासनिक कारण माना जाएगा.... लेकिन लंबित फाइलों और शुरू नहीं हुए कार्यों की स्थिति ने मोटवानी के विभागीय कामकाज पर सवाल जरूर खड़े किए हैं।
अब पिंटू यादव की परीक्षा!
युगल किशोर पिंटू यादव को PWD का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद अब नजर उनके कामकाज पर भी रहेगी.... क्या महीनों से पेंडिंग बताई जा रही फाइलें तेजी से आगे बढ़ेंगी ? क्या पुराने वर्कऑर्डर के काम जमीन पर उतरेंगे ? और क्या वार्डों में विकास की रफ्तार बदलेगी ? निगम में चेहरा बदल गया है… कमान बदल गई है… लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होगी.... क्योंकि शहर को कुर्सियों का फेरबदल नहीं, जमीन पर विकास चाहिए....
और इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल यही— क्या काम की सुस्ती ने छीन ली मोटवानी से PWD की कुर्सी ?
फिलहाल निगम का यह फैसला एक साफ संदेश देता नजर आ रहा है—मेयर की विकास की मुहिम में फाइलों की सुस्ती और काम में देरी के लिए अब जगह कम होती दिखाई दे रही है।




