धमतरी शहर को सुंदर, सुव्यवस्थित और आधुनिक बनाने के बड़े-बड़े दावे… चौड़ी सड़कों, बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था और सुनियोजित विकास की बातें… लेकिन इन दावों की हकीकत अब सवालों के घेरे में नजर आने लगी है....... नगर निगम धमतरी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जहां एक ओर कागज़ों में योजनाएं चमक रही हैं, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है..... स्थिति यह है कि नक्शे दफ्तरों में बैठकर पास किए जा रहे हैं, जबकि जमीनी सच्चाई या तो देखी नहीं जा रही या जानबूझकर नजरअंदाज की जा रही है....… इसका सीधा असर शहर की व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है, जहां आम नागरिकों को रोज़मर्रा की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है..... ताज़ा मामला शहर के आठवाणी गली स्थित विद्याकुंज स्कूल के बाजू का है, जो अब निगम की कार्यशैली पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है..... यह गली पहले से ही काफी सकरी है, जिससे आवागमन में दिक्कत होती रही है..... स्थानीय लोगों की मांग को देखते हुए महापौर द्वारा यहां बाईपास सड़क निकालने की पहल की गई थी, ताकि लोगों को राहत मिल सके और यातायात सुचारू हो..... लेकिन अब हालात पूरी तरह उलट नजर आ रहे हैं..... जिस सड़क से राहत की उम्मीद थी, वही अब कब्ज़े की चपेट में आती दिख रही है।
जमीनी हकीकत — नियम ताक पर, कब्ज़ा जारी
- मकान निर्माता मनमर्जी से सड़क पर कब्ज़ा कर निर्माण कर रहे हैं
- नियम-कायदे सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गए हैं
- बिना जमीनी निरीक्षण के नक्शा पास करने के आरोप
- भवन अनुज्ञा शाखा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
- जिम्मेदार अफसर खामोश तमाशबीन बने हुए हैं
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में यह गली पूरी तरह जाम और अव्यवस्थित हो जाएगी, जिससे न सिर्फ आमजन बल्कि आपातकालीन सेवाओं को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
जनता के मन से सवाल
क्या निगम अफसरों की इन अतिक्रमणकारियों पर कोई खास मेहरबानी है ? या फिर यह पूरा मामला मिलीभगत का नतीजा है ?
गुस्सा अब आवाज़ बन चुका है
क्षेत्र के रहवासियों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है.... लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, तो वे प्रदेश स्तर तक शिकायत करने के लिए मजबूर होंगे।
सबसे बड़ा सवाल
जब जमीन पर ही नियमों की धज्जियां उड़ रही हैं, तो शहर को सुंदर और व्यवस्थित बनाने के दावे आखिर कैसे पूरे होंगे ?
निगम की कार्यशैली पर कटघरे में सवाल
- भवन अनुज्ञा शाखा की कार्यप्रणाली पर सवाल
- निगम की कार्यशैली से जनता परेशान और मायूस
- अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकीं
ये मामला अब सिर्फ एक गली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे प्रशासन की सच्चाई को उजागर कर रहा है —
जहां नक्शा तो पास हो रहा है, लेकिन नियंत्रण पूरी तरह फेल नजर आ रहा है।
अब देखना ये है—
क्या निगम प्रशासन समय रहते जागेगा ?
या फिर कागज़ों में विकास और जमीन पर कब्ज़े का खेल यूं ही चलता रहेगा…?





