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जनदर्शन में फिर केरोसीन कांड: फरियादी ने खुद पर उड़ेला मिट्टी तेल, बड़ा सवाल—आखिर सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत?

 


कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान मंगलवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अपनी शिकायत लेकर पहुंचे एक युवक ने अचानक अपने शरीर पर केरोसीन उड़ेल लिया..... घटना ने कुछ देर के लिए पूरे परिसर को सकते में डाल दिया.... वहां मौजूद लोगों की नजरें युवक पर टिक गईं और माहौल तनावपूर्ण हो गया..... हालांकि सुरक्षा कर्मियों ने युवक को तत्काल काबू में लेकर स्थिति संभाल ली गई और एक बड़ी अनहोनी टल गई....... बताया गया है पोस्ट ऑफिस वार्ड निवासी रोहित सोनी जमीन संबंधी शिकायत लेकर जनदर्शन में पहुंचे थे...... बताया जा रहा है कि वे अपने साथ एक थैले में केरोसीन का डिब्बा भी लेकर आए थे.... शिकायत पर सुनवाई नहीं होने और लंबे समय से समस्या का समाधान नहीं निकलने से नाराज युवक ने अचानक अपने ऊपर मिट्टी तेल डाल लिया और विरोध जताने लगा..... घटना के बाद अधिकारियों ने युवक की शिकायत सुनी..... रोहित सोनी का आरोप है कि एक भाजपा नेता द्वारा उन्हें जमीन से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है.... वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि विवादित भूमि जिला अस्पताल परिसर की शासकीय जमीन है, जिस पर युवक निवास कर रहा है और नया निर्माण कराना चाहता है..... और मामला न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है।

सबसे बड़ा सवाल—सुरक्षा जांच आखिर कितनी सख्त है?

इस घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। आमतौर पर कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील सरकारी परिसरों में प्रवेश के दौरान जांच की व्यवस्था रहती है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति आसानी से अपने साथ केरोसीन जैसी ज्वलनशील सामग्री अंदर ले जा रहा है तो यह सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है..... लोगों के बीच चर्चा का विषय यह भी बना रहा कि यदि समय रहते उन्हे नही रोके रहते तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी...... ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि प्रवेश द्वार पर जांच के दौरान थैले और सामान की पर्याप्त जांच हुई थी या नहीं।

केरोसीन उड़ेलकर विरोध—क्या बनता जा रहा है नया ट्रेंड?

पिछले कुछ वर्षों में सरकारी कार्यालयों, जनदर्शन कार्यक्रमों और प्रशासनिक परिसरों में शिकायतों से परेशान लोग विरोध दर्ज कराने के लिए खुद पर केरोसीन या पेट्रोल डालने जैसे खतरनाक कदम उठाते नजर आए हैं..… कई मामलों में यह केवल विरोध का तरीका होता है, लेकिन कई बार ऐसी घटनाएं बड़े हादसों में भी बदल चुकी है...... वही जानकारो का मानना है कि इस तरह के कदम न केवल व्यक्ति की जान के लिए खतरा होते हैं, बल्कि आसपास मौजूद अन्य लोगों की सुरक्षा को भी जोखिम में डाल देते हैं..... यही वजह है कि प्रशासनिक परिसरों में सुरक्षा जांच को और मजबूत बनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है..... धमतरी कलेक्ट्रेट में हुई यह घटना भले ही बड़े हादसे में तब्दील नहीं हुई, लेकिन इसने दो महत्वपूर्ण सवाल जरूर छोड़ दिए हैं—एक, शिकायतों के निराकरण में देरी से बढ़ती लोगों की नाराजगी, और दूसरा, संवेदनशील सरकारी परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति।



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