धमतरी नगर पालिक निगम में विकास और व्यवस्था को लेकर एक तरफ बड़े-बड़े दावे और ऐलान हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ उन्हीं दावों के बीच विभागीय अधिकारों और जिम्मेदारियों को लेकर अंदरूनी तनातनी की तस्वीर सामने आने लगी है...... शहर की सड़कों की बदहाली पर आमजन पहले ही सवाल उठा रहा है— सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क ? —और इसी बीच अब निगम के भीतर विभागीय हस्तक्षेप को लेकर उठी आवाज ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है...... मामला उस वक्त सुर्खियों में आया, जब जल विभाग प्रभारी अखिलेश सोनकर ने पार्षदों के व्हाट्सऐप ग्रुप में अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए साफ शब्दों में लिखा कि वे जल विभाग संभाल रहे हैं और सभी प्रभारी अपने-अपने विभाग को अच्छी तरह संभालें...... संदेश छोटा था, लेकिन उसके पीछे छिपी नाराजगी और बेबसी ने निगम की अंदरूनी तस्वीर पर कई सवाल खड़े कर दिए...... दरअसल, चर्चा आई पीडब्ल्यूडी प्रभारी विजय मोटवानी के कथित तौर पर मुखर और बड़बोले रवैये को लेकर भी है..... शहर में सड़क, गड्ढे और निर्माण कार्यों को लेकर पहले से ही सवालों की कमी नहीं है..... ऐसे माहौल में अब यदि एक विभाग के प्रभारी दूसरे विभाग के काम में सक्रिय दखल देते नजर आएं, तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है निगम में आखिर जिम्मेदारी की सीमा तय कौन करेगा ?
मैं जल विभाग संभाल रहा हूं… —एक लाइन ने खोल दी भीतर की पीड़ा
जल विभाग प्रभारी अखिलेश सोनकर का पार्षद ग्रुप में लिखा संदेश अब निगम के गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है..... उनका संदेश महज विभागीय अनुशासन की बात नहीं करता, बल्कि उसमें अपने जिम्मेदारी वाले विभाग को लेकर एक तरह की पीड़ा और अधिकार बचाने की गुहार भी दिखाई देती है...... उन्होंने संदेश के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा कि वे जल विभाग को संभाल रहे हैं और सभी लोग अपने-अपने विभाग को अच्छी तरह संभालें..... यानी सवाल सिर्फ पाइपलाइन का नहीं है.... सवाल यह भी है कि किस विभाग की जिम्मेदारी किसके पास है और फैसले कौन लेगा ?
उधर नया ऐलान… बनियापारा की पाइपलाइन 50 साल पुरानी, दो दिन में बदलने का दावा!
इसी बीच आई पीडब्ल्यूडी प्रभारी विजय मोटवानी की ओर से बनियापारा वार्ड में खराब पाइपलाइन को लेकर बड़ा दावा संबंधित पाइपलाइन को करीब 50 साल पुरानी बताते हुए पूरे वार्ड की पाइपलाइन बदलने का काम सिर्फ दो दिन के भीतर पूरा करने की बात कही गई है..... यही दावा अब कई सवाल भी खड़े कर रहा है...... यदि पाइपलाइन वास्तव में पांच दशक पुरानी है, तो सवाल उठता है कि इतने वर्षों से इसकी हालत और जरूरतों का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ ? और यदि पूरी पाइपलाइन बदलने की जरूरत है, तो क्या दो दिन में इतना बड़ा काम वास्तविक रूप से पूरा हो पाएगा ? सबसे बड़ा सवाल यह भी है क्या जल विभाग की तकनीकी और प्रशासनिक जिम्मेदारी से जुड़े ऐसे फैसलों में संबंधित विभाग प्रभारी की भूमिका और सहमति जरूरी नहीं होनी चाहिए ?
शहर की सड़कें पहले ही सवालों के घेरे में… अब विभागीय दावे भी चर्चा में
धमतरी शहर में जगह-जगह सड़कों की हालत को लेकर आमजन की नाराजगी सामने आती रही है..... बारिश के मौसम में गड्ढों ने परेशानी और बढ़ा दी है....... कई जगह सड़क की तलाश गड्ढों के बीच करनी पड़ती है.....
लोगों के बीच अब तंज सुनाई देने लगा है—
धमतरी में सड़क पर गड्ढे नहीं, गड्ढों में सड़क दिखाई देती है
ऐसे समय में जब जनता को मजबूत सड़क, व्यवस्थित जलापूर्ति और समय पर मरम्मत की जरूरत है, निगम के भीतर प्रभारी बनाम प्रभारी की खींचतान की खबरें सामने आना निश्चित तौर पर चिंता का विषय है।
बड़बोले दावों से ज्यादा जरूरी है जमीन पर काम
निगम में किसी भी विभाग की जिम्मेदारी संभालना केवल घोषणा करने का नाम नहीं है.... जनता को दावा नहीं, परिणाम चाहिए..... उन्हें यह जानना है सड़क कब सुधरेगी, पानी की समस्या कब खत्म होगी, पाइपलाइन कब बदलेगी और बारिश में उनके घरों के सामने कीचड़ और गड्ढों से कब निजात मिलेगी...… बनियापारा की पाइपलाइन को लेकर किया गया दो दिन में काम पूरा करने का दावा अब निगाहों में रहेगा...... यदि दावा जमीन पर उतरता है तो निश्चित तौर पर जनता को राहत मिलेगी, लेकिन यदि घोषणा महज घोषणा बनकर रह गई तो सवाल और गहरे होंगे।
अब निगाहें निगम के जिम्मेदारों पर
फिलहाल धमतरी नगर निगम में उठी यह अंदरूनी आवाज कई सवाल छोड़ रही है...... क्या विभागीय सीमाएं स्पष्ट हैं ? क्या हर प्रभारी अपने विभाग की जिम्मेदारी स्वतंत्र रूप से निभा रहा है ? क्या दूसरे विभाग के काम में हस्तक्षेप को लेकर कोई स्पष्ट व्यवस्था है ? और क्या बड़े-बड़े ऐलानों से पहले संबंधित विभागों के बीच समन्वय किया जा रहा है ?
सबसे अहम बात—शहर को बयान नहीं, समाधान चाहिए।
जल विभाग प्रभारी की पीड़ा ने निगम के भीतर चल रही खींचतान का संकेत दे दिया है..... अब देखना यह है 50 साल पुरानी बताई जा रही बनियापारा की पाइपलाइन दो दिन के ऐलान में सचमुच बदलती है या यह भी धमतरी के उन तमाम अधूरे दावों की फेहरिस्त में शामिल हो जाती है, जिनका इंतजार जनता लंबे समय से कर रही है..... क्योंकि शहर की जनता अब सिर्फ यह नहीं पूछ रही कि कौन किस विभाग का प्रभारी है… जनता पूछ रही है—आखिर काम का असली जिम्मेदार कौन है ?






