छत्तीसगढ़ का मिनी गोवा कहा जाने वाला गंगरेल बांध इन दिनों सैलानियों से गुलजार है… नीला पानी, चारों तरफ हरियाली, खूबसूरत वादियां और बोटिंग-वाटर स्पोर्ट्स का रोमांच पर्यटकों को लगातार अपनी ओर खींच रहा है…
धमतरी ही नहीं, प्रदेश के अलग-अलग जिलों और पड़ोसी ओडिशा से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं… लेकिन इसी खूबसूरती और रोमांच के बीच अब नियम-कायदों और लोगों की सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है...... मामला गंगरेल में वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराई गई जमीन पर हो रहे निर्माण से जुड़ा है......
आरोप है निर्धारित नियम-शर्तों में अस्थाई निर्माण के प्रावधान होने के बावजूद मौके पर पक्के स्ट्रक्चर खड़े किए जा रहे हैं..... ऐसे में सवाल सीधा है—अगर पक्के निर्माण की अनुमति है तो आखिर किस नियम और किस विभाग की मंजूरी से ? और अगर अनुमति केवल अस्थाई निर्माण तक सीमित है तो फिर पक्के निर्माण किस आधार पर हो रहे हैं ? बताया जा रहा है पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एंटार्कटिका सी वर्ल्ड वाटर स्पोर्ट्स नामक संस्था को यहां वाटर स्पोर्ट्स संचालन की अनुमति दी गई है..... संस्था को करीब 5 एकड़ जमीन रिसॉर्ट के लिए और करीब 12 एकड़ जमीन वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के लिए उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है। इसके लिए करीब 20 बिंदुओं में नियम और शर्तें तय होने की जानकारी है।
यहीं से सवाल और गंभीर हो जाता है।
गंगरेल करीब 32 TMC क्षमता वाला बड़ा जलाशय है..... बारिश के मौसम में इसके कैचमेंट एरिया—विशेषकर ऊपरी क्षेत्रों—में भारी बारिश होने पर बांध में पानी की इनफ्लो अचानक और तेजी से बढ़ सकती है..... इसी साल ऐसी स्थिति भी सामने आई, जब कैचमेंट से बड़ी मात्रा में पानी पहुंचने के कारण बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ा और हालात को नियंत्रित करने के लिए बांध के 14 गेट तक खोलने पड़े....... ऐसे में यहां चिंता गेटों से छोड़े जाने वाले पानी से निर्माण को नुकसान की नहीं, बल्कि कैचमेंट एरिया से अचानक आने वाली भारी इनफ्लो और उसके कारण जलस्तर तथा आसपास की परिस्थितियों में तेजी से होने वाले बदलाव की है..... सवाल यह है जिस क्षेत्र में पर्यटक बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और जहां निर्माण गतिविधियां हो रही हैं, वहां ऐसी अचानक बदलने वाली स्थिति को ध्यान में रखकर सुरक्षा का तकनीकी आकलन किया गया है या नहीं ? कैचमेंट में अचानक भारी बारिश हुई… कुछ ही घंटों में इनफ्लो कई गुना बढ़ी… जलस्तर तेजी से ऊपर आया, तो वहां मौजूद लोगों को सुरक्षित निकालने का प्लान क्या है ? क्या खतरे वाले हिस्सों की पहचान की गई है ? क्या इमरजेंसी अलर्ट और सुरक्षित निकासी का रास्ता तय है ? और सबसे बड़ा सवाल—अगर नियमों को नजरअंदाज कर कोई निर्माण किया जा रहा है और भविष्य में अचानक कोई हादसा हो गया, तो लोगों की जान की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा ? यहां संबंधित विभागों की निगरानी भी सवालों के घेरे में आती है..... क्या निर्माण की अनुमति ली गई है ? क्या निर्माण निर्धारित जमीन की सीमा में है ? क्या पक्के निर्माण की स्वीकृति मौजूद है ? क्या तय 20 नियम-शर्तों का पालन किया जा रहा है ? और क्या बांध में अचानक बढ़ने वाली इनफ्लो को ध्यान में रखकर सुरक्षा संबंधी तकनीकी जांच की गई है ? इन सवालों का वास्तविक जवाब संबंधित विभागों के निरीक्षण, अनुमति संबंधी दस्तावेज और तकनीकी जांच सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा...... गंगरेल का पर्यटन बढ़ना धमतरी के लिए अच्छी तस्वीर है..... इससे रोजगार और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिलेगा..... लेकिन पर्यटन की खूबसूरती के बीच नियम-कायदे और इंसानी जिंदगी की सुरक्षा पीछे नहीं छूटनी चाहिए..... क्योंकि बांध के कैचमेंट में मौसम कब करवट ले… इनफ्लो कब अचानक बढ़ जाए, इसका खतरा बारिश के मौसम में बना रहता है...... इसलिए सवाल निर्माण का ही नहीं, बल्कि उस तैयारी का भी है जो किसी अचानक पैदा हुई आपात स्थिति में सैलानियों की जिंदगी बचाने के काम आएगी।





