कुछ तस्वीरें सिर्फ दिखाई नहीं देतीं… दिल के भीतर उतर जाती हैं.... हाथों में झाड़ू, माथे पर पसीना और आंखों में अपने शहर को संवारने का ख्वाब लिए जब आशीष सोनी, चेतन सोनकर, मनीष चोधरी और युवाओं की टोली तालाबों की सफाई के लिए उतरी, तो मानो एक ही आवाज गूंज रही थी—
यह शहर हमारा है… इसे संवारेंगे भी हम!
न किसी आदेश का इंतजार किया, न किसी और पर जिम्मेदारी डालकर पीछे हटे। युवाओं ने खुद पहल की और फिट एंड क्लीन धमतरी के नाम से सफाई की ऐसी मुहिम शुरू कर दी, जिसका मकसद सिर्फ जमीन से कचरा उठाना नहीं, बल्कि लोगों के दिलों में शहर के प्रति जिम्मेदारी जगाना है।
आशीष ने बढ़ाया कदम… चेतन-मनीष जुड़े और बनता गया कारवां
कहते हैं बदलाव के लिए भीड़ नहीं, पहला कदम उठाने वाला हौसला चाहिए.... आशीष सोनी ने पहल की तो चेतन सोनकर और मनीष चोधरी जैसे साथी साथ खड़े हुए.... फिर युवा जुड़ते गए और हाथों में झाड़ू लेकर निकल पड़ी एक ऐसी टोली, जिसने शिकायत करने के बजाय खुद तस्वीर बदलने की कोशिश शुरू कर दी... तालाब किनारे पड़ा कचरा उठाते इन युवाओं के हाथ जरूर मैले हुए, कपड़ों पर धूल भी लगी और माथे पर पसीना भी आया… मगर शायद अपने शहर के लिए बहाया गया यही पसीना सबसे खूबसूरत था।
तालाब से उठी है आवाज… अब हर गली तक पहुंचाने का इरादा
तालाबों की सफाई इस कहानी का अंत नहीं, सिर्फ पहला पन्ना है.... अब फिट एंड क्लीन धमतरी को वार्डों, गलियों और मोहल्लों तक ले जाने की तैयारी है..... युवाओं का मकसद साफ है—कचरा हटाने के साथ ऐसी सोच पैदा की जाए कि लोग दोबारा सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने से पहले एक बार जरूर सोचें..... क्योंकि साफ शहर सिर्फ सफाईकर्मियों से नहीं बनता, जिम्मेदार नागरिकों से बनता है।
एक ख्वाब है… कभी धमतरी का नाम भी स्वच्छता की मिसाल बने
युवाओं ने सपना छोटा नहीं देखा है..... उनकी ख्वाहिश है जिस तरह इंदौर ने स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई, उसी तरह एक दिन धमतरी का नाम भी साफ-सुथरे और जागरूक शहर के तौर पर गर्व से लिया जाए.... मंजिल दूर हो सकती है, मगर सफर शुरू हो चुका है.... आज कुछ युवा निकले हैं… कल शायद कुछ सौ निकलें… और जिस दिन पूरा शहर इस जज़्बे के साथ खड़ा हो गया, उस दिन धमतरी की तस्वीर बदलने से शायद कोई नहीं रोक पाएगा..
ये सिर्फ झाड़ू नहीं… धमतरी से मोहब्बत का इजहार है
सबसे बड़ा सवाल अब शहरवासियों से है—
अगर आशीष सोनी, चेतन सोनकर, मनीष चोधरी और उनके युवा साथी अपने शहर के लिए वक्त निकाल सकते हैं, झाड़ू उठा सकते हैं और पसीना बहा सकते हैं… तो क्या हम अपने शहर को गंदा न करने का छोटा-सा वादा नहीं कर सकते ? इन युवाओं की कोशिश को सिर्फ सफाई अभियान कह देना शायद कम होगा.... ये धमतरी से मोहब्बत का इजहार है.... ये जिम्मेदारी का पैगाम है.... ये नौजवानों के हौसले की कहानी है.... और शायद आने वाले वक्त में जब इस मुहिम की कहानी लिखी जाएगी, तो शुरुआत की चंद तस्वीरें यही बताएंगी— कुछ नौजवान निकले थे हाथों में झाड़ू लेकर… इरादा सिर्फ कचरा हटाने का नहीं था, अपने धमतरी की तकदीर और तस्वीर दोनों संवारने का था।





