धमतरी जिले में आफत की बारिश के बीच वनांचल क्षेत्र लटियारा से सामने आई ये तस्वीरें सिस्टम से सीधा सवाल पूछ रही हैं..... तस्वीर में कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि एक बीमार ग्रामीण की जिंदगी बचाने की जद्दोजहद है...... तबीयत बिगड़ने पर गांव के गोपेश पटेल को अस्पताल पहुंचाना था, लेकिन अस्पताल तक जाने के रास्ते में उफनता डूमर नाला मौत का खतरा बनकर खड़ा था...... ऐसे हालात में ग्रामीणों ने मरीज को खाट पर लिटाया और कंधों पर उठाकर तेज बहाव वाले नाले को पार कराया। एक तरफ पानी का तेज बहाव… दूसरी तरफ जिंदगी बचाने की मजबूरी… और बीच में सिस्टम की वह हकीकत, जिसे देखकर शायद किसी भी संवेदनशील इंसान का दिल दहल जाए.... सरकारी योजनाओं की बातें होती हैं… विकास के दावे होते हैं… अधिकारियों के दौरे भी किए जाते हैं… लेकिन लटियारा की ये तस्वीरें बता रही हैं कि जमीन पर हालात आखिर कितने बदहाल हैं...... ग्रामीणों का कहना है डूमर नाले पर पुलिया निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है, लेकिन आज तक समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ..... बारिश आते ही यही नाला गांव के लोगों के लिए आफत बन जाता है..... स्कूली बच्चों को स्कूल जाने में खतरा, मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में खतरा, बुजुर्गों के लिए खतरा और रोजमर्रा की जिंदगी भी जोखिम के साये में..... शादी-ब्याह हो या कोई जरूरी काम… बीमारी हो या आपात स्थिति… ग्रामीणों को इसी उफनते नाले के सामने अपनी मजबूरी लेकर खड़ा होना पड़ता है.....
सवाल है—आखिर विकास का रास्ता गांव तक कब पहुंचेगा ?
कागजों में विकास की फाइलें आगे बढ़ती हैं, योजनाएं बनती हैं, प्रस्ताव तैयार होते हैं, निरीक्षण और दौरे भी होते हैं… लेकिन जब एक मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को खाट उठाकर उफनता नाला पार करना पड़े, तो फिर उन तमाम दावों की असलियत पर सवाल उठना लाजिमी है...... फाइलों में विकास हो रहा है… लेकिन जमीन की सच्चाई आपके सामने है..... प्रशासन बारिश के दौरान लोगों से उफनते नदी-नालों से दूर रहने की अपील कर रहा है...... अपील अपनी जगह बिल्कुल सही है, लेकिन लटियारा के ग्रामीणों का सवाल भी उतना ही वाजिब है —




