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लाखो दीपों के बीच अचानक ठहर गई हर नजर… जब वर्षा ने हाथों से नहीं, पैरों से जला दिया उम्मीद का दीया


रूद्रेश्वर मंदिर घाट पर उस शाम रोशनी की कोई कमी नहीं थी। घाट पर एक के बाद एक दीप जगमगा रहे थे। चारों ओर उजाला था, श्रद्धा का माहौल था और आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम में सेवा, समर्पण और जनभागीदारी का संदेश गूंज रहा था। लेकिन तभी भीड़ के बीच कुछ ऐसा हुआ कि सैकड़ों जलते दीपों के बावजूद लोगों की नजरें एक ही जगह ठहर गईं...... एक दिव्यांग छात्रा धीरे-धीरे आगे बढ़ी… उसने अपने पैरों से दीप उठाया… बाती को रोशन किया… और रूद्रेश्वर घाट पर उम्मीद का एक और दीया जला दिया।

वह छात्रा थी वर्षा ध्रुव...

उस क्षण शायद किसी ने नहीं सोचा था कि आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम का यह छोटा-सा दृश्य पूरी शाम की सबसे बड़ी और सबसे मार्मिक तस्वीर बन जाएगा..... दीया छोटा था… मगर उसके पीछे खड़ा हौसला बहुत बड़ा था..... ग्राम सियादेही की रहने वाली वर्षा कक्षा 11वीं में कला संकाय की छात्रा हैं..... फिलहाल रूद्री स्थित एडजेस्ट फाउंडेशन में रहकर पढ़ाई कर रही हैं..... जिंदगी ने उन्हें ऐसी चुनौतियां दीं, जिनके सामने कई लोग उम्मीद छोड़ देते हैं..... मगर वर्षा ने रास्ता बदलना मंजूर किया, मंजिल नहीं।

वर्षा ने सिर्फ दीप नहीं जलाया… अपने हौसले की रोशनी दिखाई

वर्षा के पिता नरेंद्र कुमार ध्रुव और माता हीरू बाई खेती-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं..... आर्थिक हालात चुनौतीपूर्ण हैं। घर में संसाधन सीमित हैं, लेकिन बेटी के सपनों की उड़ान सीमित नहीं है..... इसी संघर्ष के बीच वर्षा पढ़ रही हैं और अपने भविष्य को संवारने का सपना देख रही हैं..... जब उन्होंने अपने पैरों से दीप प्रज्ज्वलित किया तो वह दृश्य जैसे बहुत कुछ कह गया—

हालात मेरे रास्ते रोक सकते हैं,
मेरी हिम्मत नहीं

वहां मौजूद लोगों के लिए यह केवल एक दीप प्रज्ज्वलन नहीं था..... यह आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और उम्मीद का जीवंत संदेश था।

अभावों के बीच योजनाओं ने दिया सहारा

वर्षा के अनुसार, उनके परिवार को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है..... उनकी माता के नाम गरीबी रेखा का राशन कार्ड है, जिसके माध्यम से परिवार को प्रतिमाह 35 किलो चावल मिलता है..... महतारी वंदन योजना के तहत भी उनकी माता को आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है..... इन सुविधाओं ने परिवार की कठिन परिस्थितियों में कुछ सहारा दिया है..... लेकिन वर्षा की असली ताकत शायद वह जज्बा है, जिसके सहारे वह पढ़ाई जारी रखते हुए बेहतर भविष्य का सपना देख रही हैं।

दीपों से जगमगाया रूद्रेश्वर घाट

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत रूद्रेश्वर मंदिर घाट, रूद्री में आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ..... कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधायक अजय चंद्राकर रहे..... महापौर रामू रोहरा, पुलिस अधीक्षक भावना पांडेय, पूर्व विधायक रंजना साहू, जिला पंचायत सभापति मोनिका देवांगन सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी, गणमान्य नागरिक, स्थानीय नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे..... अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर सेवा, समर्पण, सुशासन, विकास और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को जनभागीदारी के साथ अभिव्यक्त किया.... वही कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने स्वागत उद्बोधन में अभियान की गतिविधियों की जानकारी दी..... उन्होंने बताया जिले के प्रमुख धार्मिक एवं सार्वजनिक स्थलों के साथ-साथ विकासखंडों, ग्राम पंचायतों, गांवों, चौक-चौराहों, स्कूल-कॉलेज परिसरों, प्रतिष्ठानों और घरों में भी दीप प्रज्ज्वलित कर नागरिक अभियान से जुड़ रहे हैं।

विधायक चंद्राकर ने कहा—दीप सामूहिक संकल्प का प्रतीक

मुख्य अतिथि विधायक अजय चंद्राकर ने कहा सेवा संकल्प अभियान सेवा, समर्पण और जनभागीदारी की भावना को मजबूत करने का अवसर है.... उन्होंने आशीर्वाद का दीया को इसी भावना का प्रतीक बताते हुए कहा प्रत्येक दीप सेवा, सुशासन, विकास और राष्ट्र निर्माण के प्रति सामूहिक संकल्प की अभिव्यक्ति है.... उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों का उल्लेख करते हुए गरीब, किसान, महिला, युवा और वंचित वर्गों के कल्याण के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यों की बात कही..... वही महापौर रामू रोहरा ने आशीर्वाद का दीया को सेवा और संस्कार की सुंदर अभिव्यक्ति बताया, जबकि पूर्व विधायक रंजना साहू ने इसे सेवा और जनभागीदारी से जोड़ने वाला प्रयास बताया।

लेकिन कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी… लोगों के जेहन में वही तस्वीर रह गई

रूद्रेश्वर घाट पर दीप जलते रहे......

लोग आते रहे… संकल्प दोहराते रहे… घाट रोशनी से नहाता रहा… लेकिन उस शाम की सबसे बड़ी तस्वीर शायद मंच पर नहीं थी।

वह तस्वीर भीड़ के बीच थी—

वर्षा ध्रुव की....

एक बेटी, जिसने अपने पैरों से दीप जलाकर जैसे यह बता दिया.... जिंदगी अगर रास्ते कठिन कर दे, तो हौसले को रास्ता बनाना पड़ता है..... उसने कोई लंबा भाषण नहीं दिया.... बस एक दीप जलाया.... और उस एक दीप ने संघर्ष की पूरी कहानी कह दी.... रूद्रेश्वर घाट पर इस शाम सैकड़ों दीपों ने अंधेरा दूर किया, लेकिन वर्षा के पैरों से जला वह छोटा-सा दीया उम्मीद की ऐसी लौ छोड़ गया, जिसकी चमक शायद वहां मौजूद लोगों की आंखों से ज्यादा देर तक उनके दिलों में बनी रहेगी।



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