आसमान बरस रहा है… जलाशय भरते जा रहे हैं… और अब गंगरेल के गेट खुल चुके हैं..... रात के अंधेरे में गंगरेल से निकलता हजारों क्यूसेक पानी महानदी की ओर तेजी से बढ़ रहा है...... दूसरी तरफ बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा..... ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर पानी की आवक इसी रफ्तार से बढ़ती रही, तो महानदी का अगला मिजाज कैसा होगा ? 12 सितंबर की रात 9 बजे के आंकड़े हालात की गंभीर तस्वीर सामने रख रहे हैं..... गंगरेल 97.16 प्रतिशत भर चुका है, जबकि मुरुमसिल्ली 100 प्रतिशत लबालब है..... दुधावा भी 94.55 प्रतिशत और सोंदूर 75.87 प्रतिशत तक भर चुका है.... यानी जिले के प्रमुख जलाशयों में पानी लगातार जमा हो रहा है और ऊपर से नई आवक भी जारी है।
गंगरेल में 35 हजार क्यूसेक की आवक… और उतना ही पानी बाहर!
सबसे ज्यादा चिंता गंगरेल को लेकर है..... यहां इस वक्त 35 हजार क्यूसेक पानी पहुंच रहा है..... पानी का दबाव बढ़ने के साथ गंगरेल के 7 गेट खोल दिए गए हैं..... जलाशय से फिलहाल करीब 35 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है...... रुद्री बैराज के रास्ते 5 हजार क्यूसेक पानी महानदी मुख्य नहर और 30 हजार क्यूसेक पानी सीधे महानदी में जा रहा है..... यानी एक तरफ जलाशय में पानी लगातार घुस रहा है और दूसरी तरफ हजारों क्यूसेक पानी महानदी में उतर रहा है..... और सबसे अहम बात—अगर पानी की आवक और बढ़ी, तो निकासी भी बढ़ाई जा सकती है।
मुरुमसिल्ली 100%… दुधावा भी 95% के करीब
हालात सिर्फ गंगरेल तक सीमित नहीं हैं.......
मुरुमसिल्ली पूरी तरह भर चुका है.... यहां 2,567 क्यूसेक पानी की आवक दर्ज हुई है..... दुधावा 94.55 प्रतिशत भर चुका है और वहां भी 3,040 क्यूसेक पानी पहुंच रहा है..... सोंदूर 75.87 प्रतिशत पर है और उसमें 2,307 क्यूसेक पानी की आवक जारी है..... चारों तरफ पानी… ऊपर से बारिश… और जलाशयों में बढ़ती आवक—यही वजह है कि प्रशासन की निगाह अब हर पल बदलते जलस्तर पर टिकी है।
महानदी किनारे बसे गांवों में बढ़ी बेचैनी
गंगरेल से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद महानदी के जलस्तर और बहाव में तेजी आने की आशंका है..... यही वजह है कि महानदी किनारे बसे गांवों को सतर्क कर दिया गया है..... प्रशासन ने अपील की है लोग नदी, नालों और पानी के तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहें.... खासकर बच्चों और मवेशियों को नदी किनारे जाने से रोकने की जरूरत है..... पानी का बहाव कब कितना बढ़ जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है..... इसलिए सिर्फ कुछ पल का कौतूहल देखने के लिए नदी किनारे पहुंचना भारी पड़ सकता है।
अगले कुछ घंटे अहम… क्योंकि बारिश अभी बाकी है
जिला प्रशासन जलाशयों के जलस्तर और पानी की निकासी पर लगातार नजर रख रहा है..... मैदानी अमले को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं...... प्रशासन का कहना है जलाशयों में पानी की आवक और जलस्तर की स्थिति के मुताबिक पानी की निकासी आगे और बढ़ाई जा सकती है..... यानी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है____ गंगरेल लगभग लबालब है.... मुरुमसिल्ली पूरा भर चुका है.... हजारों क्यूसेक पानी महानदी में छोड़ा जा रहा है और आसमान से बारिश का खतरा अभी बना हुआ है.... ऐसे में नदी किनारे बसे गांवों के लिए सबसे जरूरी संदेश सिर्फ एक है—
सावधान रहिए… नदी का रुख देखने नहीं, नदी से दूर रहने का वक्त है.....
प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है.... क्योंकि पानी की यह कहानी अभी थमी नहीं है… और आने वाले घंटे तय करेंगे कि गंगरेल और महानदी का अगला मंजर कितना बदलता है।





