चुनावी मैदान में वोट की एक-एक गिनती मायने रखती है और लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत होती है—जनता का भरोसा। लेकिन जब यही भरोसा किसी राजनीतिक दल की अपनी चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवालों में घिरने लगे, तो सियासत गरम होना तय है..... धमतरी में अब EVM और इलेक्ट्रॉनिक मतदान को लेकर कांग्रेस के रुख पर भाजयुमो जिला महामंत्री ओमेश यादव ने ऐसा सवाल दागा है, जिसने कांग्रेस की चुनावी प्रक्रिया को ही कटघरे में खड़ा कर दिया है.... ओमेश यादव ने सवाल उठाया है यदि कांग्रेस देश के चुनावों में EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती है, इलेक्ट्रॉनिक मतदान व्यवस्था पर संदेह जाहिर करती है, तो फिर अपने संगठनात्मक चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक अथवा मोबाइल माध्यम का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है ? और अगर बैलेट पेपर ही ज्यादा भरोसेमंद है, तो फिर संगठन के चुनावों में भी उसी व्यवस्था को पूरी तरह क्यों नहीं अपनाया जाता ?
देश में EVM पर सवाल... अपने घर में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग?
यादव ने कहा कांग्रेस लंबे समय से देश की चुनावी प्रक्रिया और EVM को लेकर सवाल उठाती रही है..... ऐसे में उसके अपने संगठनात्मक चुनावों की मतदान पद्धति पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है.... उन्होंने कहा कांग्रेस कार्यालय में कहीं बैलेट पेपर की बात सामने आती है, तो संगठनात्मक चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक अथवा मोबाइल माध्यम के इस्तेमाल की बात सामने आती है.... ऐसे में कार्यकर्ताओं के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कांग्रेस का वास्तविक भरोसा किस व्यवस्था पर है ? यादव ने कांग्रेस से दो टूक पूछा—क्या इलेक्ट्रॉनिक मतदान पर अविश्वास सिर्फ देश के चुनावों के लिए है, या यही सिद्धांत कांग्रेस के अपने संगठनात्मक चुनावों पर भी लागू होता है ?
दूसरों की व्यवस्था पर शक, तो अपनी व्यवस्था की भी हो परीक्षा
ओमेश यादव ने कहा लोकतंत्र में मापदंड सुविधा के हिसाब से नहीं बदले जा सकते.... यदि किसी व्यवस्था को अविश्वसनीय माना जाता है, तो वही कसौटी अपने संगठन के चुनावों पर भी लागू होनी चाहिए.... उन्होंने कहा कांग्रेस में बूथ, ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर पर संगठनात्मक चुनाव होते हैं.... इन चुनावों में मतदाता सूची से लेकर प्रतिनिधियों के चयन, मतदान और परिणाम तक हर चरण की पारदर्शिता बेहद जरूरी है..... ऐसे में कांग्रेस को अपने कार्यकर्ताओं के सामने पूरी चुनावी प्रक्रिया साफ-साफ रखनी चाहिए..... कौन मतदान करेगा, किस तरीके से मतदान होगा और किस आधार पर परिणाम घोषित होंगे—इन तमाम सवालों का स्पष्ट जवाब कार्यकर्ताओं को मिलना चाहिए।
लोकतंत्र की असली परीक्षा अपने घर से शुरू होती है
यादव ने कटाक्ष करते हुए कहा दूसरों के चुनाव पर सवाल उठाना आसान है, लेकिन वही सवाल जब अपने संगठन के दरवाजे पर पहुंचता है, तब असली परीक्षा शुरू होती है..... उन्होंने कहा अगर कांग्रेस को लगता है कि बैलेट पेपर ज्यादा विश्वसनीय, सरल और पारदर्शी माध्यम है, तो उसे अपने संगठनात्मक चुनाव भी बैलेट पेपर से कराने चाहिए। इससे कार्यकर्ताओं को पूरी प्रक्रिया प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अवसर मिलेगा तथा चुनावी प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह के भ्रम की गुंजाइश कम होगी।
देश का चुनाव हो या पार्टी का—पैमाना एक होना चाहिये
ओमेश यादव ने कहा लोकतंत्र की खूबसूरती इसी में है कि नियम और भरोसे की कसौटी सबके लिए बराबर हो...... देश का आम चुनाव हो या किसी राजनीतिक दल का आंतरिक चुनाव—निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता के मापदंड अलग-अलग नहीं होने चाहिए.... उन्होंने कांग्रेस से मांग की कि वह अपने संगठनात्मक चुनावों की पूरी प्रक्रिया और मतदान पद्धति को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करे..... यदि कांग्रेस इलेक्ट्रॉनिक मतदान व्यवस्था को लेकर आशंकित है, तो अपने संगठनात्मक चुनावों में भी उसी सिद्धांत को लागू करते हुए बैलेट पेपर की व्यवस्था अपनाए.... अब देखना यह है EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस, अपने संगठनात्मक चुनावों को लेकर उठे इस सवाल का क्या जवाब देती है ? क्योंकि सवाल सिर्फ मतदान के तरीके का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है, जिसकी बुनियाद पर लोकतंत्र खड़ा है।





