कहते हैं… कुछ फैसले सिर्फ कागज पर नहीं लिखे जाते, वे शहर की धड़कन सुनकर लिए जाते हैं..... धमतरी में भी कुछ ऐसा ही हुआ..... श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर होने वाली मटकी फोड़ प्रतियोगिता को लेकर देर रात तक बैठकों और मंथन का दौर चला… चर्चाएं हुईं… विचार सामने आए… और फिर सुबह करीब 11:30 बजे नगर निगम में हुई अहम बैठक में आखिरकार वह फैसला सामने आया, जिसने पूरे आयोजन की तस्वीर बदल दी...... बैठक में नगर निगम, हिंदू संगठन और सर्व समाज की संयुक्त भागीदारी को लेकर विस्तार से चर्चा हुई और सर्वसम्मति से तय किया गया कि इस बार मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन मिल-जुलकर भव्य रूप में किया जाएगा..... यानी इस बार कहानी सिर्फ कृष्ण जन्माष्टमी की नहीं होगी… कहानी होगी आस्था की… उत्साह की… एकजुटता की और उस जज्बे की, जो धमतरी को बाकी शहरों से अलग पहचान देता है।
देर रात की बैठक… सुबह का फैसला… और बदल गया उत्सव का अंदाज
रात गहराती रही… लेकिन मंथन चलता रहा..... मकसद एक था—जन्माष्टमी के उत्सव को ऐसा स्वरूप देना, जिसमें शहर का हर वर्ग अपनी भागीदारी महसूस करे।
सुबह निगम में बैठक हुई और करीब 11:30 बजे तस्वीर साफ हो गई.... नगर निगम के साथ हिंदू संगठन और सर्व समाज मिलकर मटकी फोड़ प्रतियोगिता को भव्य रूप देने की दिशा में आगे बढ़ेंगे.... एक मंच… एक उत्सव… और एक शहर..... यही इस फैसले की सबसे खूबसूरत तस्वीर है।
अब निगम सिर्फ सड़क-नाली तक नहीं… शहर की संस्कृति तक भी पहुंचेगा
नगर निगम का नाम आते ही अब तक सड़क, नाली, पानी, सफाई और निर्माण कार्यों की तस्वीर सामने आती रही है.... लेकिन इस फैसले ने निगम की भूमिका में एक नया अध्याय जोड़ दिया है..... धमतरी में वर्षों से धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को सामाजिक संगठन, युवा और उत्सव समितियां अपने स्तर पर भव्य बनाते रहे हैं...
मटकी फोड़ने को लेकर युवाओं का जोश…
कृष्ण जन्माष्टमी पर गूंजते जयकारे…
सजते आयोजन स्थल…
और आस्था में डूबा पूरा शहर...
.... अब उसी उत्साह में नगर निगम भी सक्रिय साझेदार बनेगा..... और शायद यही इस फैसले की असली खूबसूरती है।
मटकी फूटेगी… लेकिन संदेश दिलों तक जाएगा
मटकी फोड़ प्रतियोगिता में भीड़ जुटेगी… ढोल बजेगा… जयकारे गूंजेंगे… युवा पिरामिड बनाएंगे… और जब मटकी टूटेगी तो तालियों से पूरा माहौल गूंज उठेगा.... लेकिन उस एक पल के पीछे संदेश कहीं बड़ा होगा.....
मतभेद से ऊपर मेल-मिलाप…
अलग-अलग पहचान से ऊपर समाज…
और सबसे ऊपर—धमतरी की एक पहचान।
यानी इस बार मटकी फोड़ना सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं… एक साथ खड़े होने का उत्सव होगा।
देर हुई… मगर शहर की धड़कन सुनाई तो दी
शहरवासियों की उम्मीद लंबे समय से रही है विकास के साथ धमतरी की आस्था, संस्कृति और परंपराओं को भी उतनी ही अहमियत मिले..... अब निगम ने इस दिशा में कदम बढ़ाया है..... क्योंकि सच यही है— शहर सिर्फ सड़क, नाली और इमारतों से नहीं बनता.... शहर बनता है उन जयकारों से, जो त्योहारों में आसमान तक पहुंचते हैं..... उन युवाओं से, जो मटकी फोड़ने के लिए पिरामिड बनाते हैं… उन समितियों से, जो आयोजन को यादगार बनाने में जुटती हैं… और उन लोगों से, जो अलग-अलग होकर भी उत्सव के वक्त एक साथ खड़े हो जाते हैं।
तो इस बार धमतरी में कहानी कुछ अलग होगी…
कान्हा का उत्सव होगा…
युवाओं का जोश होगा…
निगम का साथ होगा…
हिंदू संगठनों की भागीदारी होगी…
सर्व समाज का सहयोग होगा…
और जब मटकी टूटेगी…





