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जब नाग पंचमी पर गूंजे वैदिक मंत्र… चरक जयंती पर आयुर्वेद के सेवकों ने लिया मानवता की सेवा का संकल्प

 

सावन की पावन पंचमी… नाग पंचमी का शुभ दिन… वातावरण में आस्था और भक्ति की खुशबू और उसी पवित्र माहौल में आयुर्वेद के महान आचार्य महर्षि चरक को नमन....... हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, हटकेशर स्थित श्री गायत्री आरोग्यम आयुष पॉली क्लीनिक धमतरी में महर्षि चरक जयंती का आयोजन बेहद श्रद्धा, आत्मीयता और गरिमामय वातावरण में किया गया...... वैदिक मंत्रोच्चार के बीच एक कुंडीय हवन-पूजन से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ....... अग्नि की पवित्र लपटों के बीच जब महर्षि चरक के सिद्धांतों और आयुर्वेद की सेवा-परंपरा का स्मरण हुआ, तो ऐसा लगा मानो सदियों पुरानी चिकित्सा विरासत आज फिर वर्तमान से संवाद कर रही हो....... कार्यक्रम के बाद आयोजित संभाषा में आयुर्वेद की महत्ता, उसकी प्राचीन वैज्ञानिक दृष्टि और बदलते दौर में आयुष चिकित्सा की बढ़ती भूमिका पर सार्थक चर्चा हुई...... कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. कृपा शंकर ठाकुर ने आयुष चिकित्सकों को संबोधित करते हुए कहा चिकित्सक जिस पैथी से जुड़े हैं, उसके प्रति पूरी श्रद्धा, निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करें..... उन्होंने कहा आयुष का भविष्य उज्ज्वल है, लेकिन इस उज्ज्वल भविष्य की असली ताकत चिकित्सकों की निष्ठा और मरीजों के प्रति उनका सेवा-भाव है...... उन्होंने चिकित्सकों से महर्षि चरक के सिद्धांतों को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखने, बल्कि उन्हें चिकित्सा और व्यवहार में उतारने का आह्वान किया..... साथ ही आयुर्वेद की विशिष्ट विधाओं पंचकर्म, क्षारसूत्र और अग्निकर्म का अधिक प्रभावी ढंग से प्रयोग करने पर भी जोर दिया...... डॉ. ठाकुर ने धमतरी के आयुष चिकित्सकों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा अन्य शहरों की अपेक्षा यहां के आयुष चिकित्सक बेहतर कार्य कर रहे हैं...... उन्होंने सभी चिकित्सकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा आयुर्वेद केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन और मानव सेवा की एक समृद्ध परंपरा है...... वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अवध पचौरी ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया...... उन्होंने महर्षि चरक के जीवन, उनके चिकित्सा दर्शन और आयुर्वेद की मूल भावना पर प्रकाश डालते हुए चिकित्सकों को अपनी प्राचीन विरासत से जुड़कर उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रेरणा दी...... कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण क्षण उस समय आया, जब जिला आयुष अधिकारी डॉ. के. आर. ठाकुर ने उपस्थित चिकित्सकों एवं सभी लोगों को चरक शपथ दिलाई....... शपथ के दौरान चिकित्सा को केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव जीवन की सेवा और पीड़ा को कम करने का पवित्र दायित्व मानकर निभाने का संकल्प लिया गया...... वातावरण में मौजूद हर चेहरा मानो यही संदेश दे रहा था कि सदियों पहले महर्षि चरक ने जो दीप जलाया था, उसकी लौ आज भी आयुर्वेद के सेवकों के हाथों में सुरक्षित है..... इस गरिमामय अवसर पर वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. एस. एन. चंद्राकर, डॉ. एम. एल. व्यास, डॉ. खिलेश साहू, डॉ. धर्मेन्द्र सिन्हा, डॉ. प्रीति सिन्हा, डॉ. देवेंद्र सिन्हा, डॉ. देवेश सिन्हा, डॉ. तेज राम साहू, डॉ. भूपेंद्र सोनी, डॉ. राकेश साहू, डॉ. गिरवर साहू, डॉ. गोपेश साहू, डॉ. धर्मेश साहू, डॉ. सुरेश कुम्भकार, डॉ. नरेंद्र चंद्राकर, डॉ. अवध पचौरी सहित अनेक चिकित्सक उपस्थित रहे...... इसके साथ ही योगेश गुप्ता, पूजा नाग, प्रकाश मीनपाल, रानी मीनपाल, नरेश नाग, महेंद्र संभाकर, डेमन पटेल, हरीश चंद्र साहू, भावेश, तिलेश्वरी, दुलारी, निशा, प्रेमलता, अनामिका, टिकेश्वरी, अंचल, खुशबू सहित बड़ी संख्या में लोग इस आत्मीय आयोजन के साक्षी बने..... कार्यक्रम का संचालन डॉ. दिनेश कुमार नाग ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. धर्मेन्द्र सिन्हा ने किया। कार्यक्रम का प्रायोजन हिमालया वेलनेस द्वारा किया गया..... महर्षि चरक जयंती का यह आयोजन एक तारीख या एक परंपरा को याद करने भर का अवसर नहीं था… यह उस महान विरासत को नमन था, जिसने हजारों वर्षों पहले मानव जीवन को स्वस्थ रखने का रास्ता दिखाया..... हवन की पवित्र अग्नि से लेकर चरक शपथ तक, हर क्षण यही संदेश देता रहा—आयुर्वेद की असली ताकत उसकी औषधियों में ही नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे सेवा, करुणा और मानवता के भाव में है।



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