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एल्डरमेन नियुक्ति पर संग्राम: समर्पण हारा, पहुंच जीती! निष्ठावान कार्यकर्ताओं के अरमानों पर चला बुलडोजर, संगठन में उठे बगावत के सुर

 


धमतरी नगर निगम सहित प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों में घोषित एल्डरमेन नियुक्तियों ने सत्ता पक्ष के भीतर ही असंतोष का ऐसा तूफान खड़ा कर दिया है, जिसकी गूंज अब कार्यकर्ताओं से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सुनाई देने लगी है...... जिन नियुक्तियों को संगठन की मजबूती और समर्पित कार्यकर्ताओं के सम्मान के रूप में देखा जाना चाहिए था, वही सूची अब सवालों, नाराजगी और अंदरूनी आक्रोश का कारण बनती नजर आ रही है....... वर्षों तक पार्टी के लिए संघर्ष करने वाले, चुनावी मैदान में संगठन का झंडा उठाकर पसीना बहाने वाले और हर सुख-दुख में पार्टी के साथ खड़े रहने वाले अनेक कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.......



कार्यकर्ताओं के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि पार्टी सिंबल के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले चेहरों को भी एल्डरमेन बनाकर सम्मानित कर दिया गया, जबकि वर्षों से पार्टी की विचारधारा और संगठन के प्रति निष्ठा निभाने वालों को कोई स्थान नहीं मिला....... इससे कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश जाने की चर्चा है कि अब संगठन में संघर्ष और समर्पण से ज्यादा महत्व प्रभाव, पहुंच और राजनीतिक समीकरणों को दिया जा रहा है...... इतना ही नहीं, नियुक्तियों को लेकर राकापा के प्रभाव की चर्चाएं भी तेज हैं...... संगठन के भीतर एक वर्ग खुलकर तो नहीं, लेकिन दबे स्वर में यह सवाल उठा रहा है आखिर ऐसे लोगों को प्राथमिकता क्यों दी गई जिनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और संगठनात्मक निष्ठा को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं...... इससे पार्टी का एक बड़ा धड़ा खुद को असहज और उपेक्षित महसूस कर रहा है....... नाराजगी का एक बड़ा कारण यह भी है अनुभव, वरिष्ठता, उम्र, संघर्ष, समर्पण और संगठन के प्रति वर्षों की निष्ठा को मानो पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया...... जिन कार्यकर्ताओं ने दशकों तक पार्टी के संस्कारों और अनुशासन को जीवित रखा, कठिन समय में संगठन का साथ नहीं छोड़ा, उन्हें अवसर नहीं मिल सका...... इससे कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि यदि वर्षों की तपस्या और समर्पण का यही परिणाम है तो भविष्य में संगठन के लिए त्याग करने वालों का मनोबल कैसे बना रहेगा...... नियुक्तियों को लेकर सबसे ज्यादा हैरानी और चर्चा जिस तथ्य को लेकर हो रही है, वह यह है कि आठ एल्डरमेनों में से चार नाम मात्र 100 मीटर के दायरे में स्थित एक ही लाइन से चुन लिए गए हैं....... इस फैसले ने पूरे शहर में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है...... कार्यकर्ताओं का कहना है जब पूरे नगर निगम क्षेत्र में समर्पित और योग्य कार्यकर्ताओं की लंबी फौज मौजूद थी, तब एक ही इलाके को इतनी प्राथमिकता देने के पीछे आखिर क्या वजह रही..... अब संगठन के भीतर यह सवाल खुलकर गूंजने लगा है कि क्या पार्टी का अनुशासन, संस्कार, निष्ठा और समर्पण केवल भाषणों तक ही सीमित रह गया है ? क्या वर्षों तक झंडा उठाकर संघर्ष करने वालों की मेहनत का मूल्य अब समाप्त हो चुका है ? एल्डरमेन नियुक्तियों की यह सूची जहां कुछ लोगों के लिए खुशी का पैगाम लेकर आई है, वहीं बड़ी संख्या में निष्ठावान कार्यकर्ताओं के दिलों में पीड़ा, निराशा और असंतोष छोड़ गई है........ फिलहाल नियुक्तियों को लेकर उठे सवालों ने संगठन के भीतर एक नई बहस को जन्म दे दिया है......आने वाले दिनों में यह नाराजगी कितनी गहराती है और संगठन इसे किस तरह संभालता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


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