जिले की कमान संभालने के बाद से पुलिस कप्तान भावना पांडे की सक्रिय और संवेदनशील कार्यशैली लगातार सुर्खियों में है..... अपराध हो या यातायात... पुलिस कप्तान की नजर सिर्फ घटना के बाद होने वाली कार्रवाई पर नहीं, बल्कि घटना होने से पहले उसे रोकने की कोशिश पर भी है...... यही वजह है कि पुलिसिंग अब सिर्फ थानों और दफ्तरों तक सिमटी नजर नहीं आती, बल्कि सड़क पर उतरकर आम आदमी की परेशानी को महसूस करती दिखाई दे रही है...... इसी ग्राउंड पुलिसिंग की एक बेहद दिलचस्प और भावनात्मक तस्वीर शहर की सड़क पर सामने आई..... सड़क के बीच मवेशी आराम फरमा रहे थे... वाहन चालक रास्ता तलाश रहे थे... और ट्रैफिक पुलिस के जवान हाथों में डंडा लेकर उन बेजुबानों को सड़क से किनारे करने में जुटे थे..... एक तरफ मवेशियों का सुकून... दूसरी तरफ जवानों की मशक्कत..... तस्वीर देखकर ऐसा लगा मानो शहर की यातायात व्यवस्था के साथ अब पुलिस को मवेशी प्रबंधन की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ रही हो..... लेकिन इस तस्वीर के पीछे एक बेहद गंभीर वजह है—सड़क पर बैठा एक मवेशी किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता है।
हादसा होने का इंतजार नहीं... खतरा देखकर पहले ही मोर्चा
पुलिस कप्तान भावना पांडे की कार्यशैली की सबसे खास बात यही नजर आती है, पुलिस खतरे के सामने आने का इंतजार नहीं कर रही, बल्कि संभावित खतरे को पहले ही खत्म करने की कोशिश कर रही है..... सड़क पर खुलेआम घूमते और बीच सड़क पर बैठे मवेशी वाहन चालकों के लिए बड़ा खतरा हैं.... खासकर रात के वक्त जब सड़क पर बैठे मवेशी दिखाई नहीं देते, तब उन्हें बचाने के प्रयास में वाहन अनियंत्रित होने और गंभीर सड़क हादसे होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है..... इसी खतरे को गंभीरता से लेते हुए पुलिस कप्तान के निर्देश पर ट्रैफिक पुलिस के जवान सड़क पर उतरकर मवेशियों को किनारे कर रहे हैं
बेजुबान आराम में... जवान ड्यूटी में
सड़क के बीच बैठे मवेशियों को शायद इस बात का अंदाजा नहीं कि उनके कारण पीछे वाहनों की कतार लग रही है और किसी वाहन चालक की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है...... वे अपनी जगह बेफिक्र थे... लेकिन जवान अपनी जिम्मेदारी से बेखबर नहीं थे..... किसी जवान ने मवेशी को सड़क से हटाया, तो किसी ने वाहनों को सुरक्षित रास्ता दिया..... यह सिर्फ ट्रैफिक संभालने की कवायद नहीं थी, बल्कि एक संभावित हादसे को टालने की कोशिश थी
सड़क पर बैठा मवेशी... किसी घर की खुशियां न छीन ले
शहर की सड़कों पर खुलेआम छोड़े जाने वाले मवेशी अब सिर्फ यातायात की समस्या नहीं रह गए हैं...... ये सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं...... कई बार मवेशी को बचाने के चक्कर में बाइक सवार गिर जाते हैं, कार अनियंत्रित हो जाती है या पीछे से आ रहा वाहन टकरा जाता है..... एक मवेशी को सड़क पर छोड़ना शायद मालिक के लिए छोटी लापरवाही हो... लेकिन किसी दूसरे परिवार के लिए यह जिंदगी भर का दर्द बन सकती है..... यही वह दर्द है जिसे समझते हुए पुलिस अब सिर्फ अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं रहना चाहती
कप्तान भावना पांडे की नजर सिर्फ अपराध पर नहीं... आम आदमी की सुरक्षा पर भी
पुलिस कप्तान भावना पांडे की सक्रियता का असर अब क्राइम कंट्रोल के साथ-साथ ट्रैफिक व्यवस्था में भी जमीन पर दिखाई देने लगा है..…. लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना हो, अपराध से बचाव के तरीके बताने हों या सड़क पर संभावित खतरे को दूर करना हो—पुलिस कप्तान लगातार एक ऐसी पुलिसिंग पर जोर देती दिखाई दे रही हैं, जिसमें कार्रवाई के साथ जागरूकता और संवेदनशीलता भी शामिल है..... यही वजह है कि पुलिस कप्तान की इस कार्यशैली को लेकर शहर में सकारात्मक चर्चा भी है।
सवाल पुलिस से नहीं... अब मवेशी मालिकों से भी
पुलिस जवान सड़क पर उतर रहे हैं... मवेशियों को हटा रहे हैं... ट्रैफिक संभाल रहे हैं... लेकिन सवाल यह भी है आखिर कब तक ? क्या मवेशी मालिक अपनी जिम्मेदारी समझेंगे ? क्या वे अपने पशुओं को खुलेआम सड़क पर छोड़ना बंद करेंगे ? क्योंकि सड़क पुलिस की जिम्मेदारी जरूर है, लेकिन सड़क सुरक्षा सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं हो सकती..... अगर हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे तो शायद पुलिस को सड़क पर डंडा लेकर मवेशियों के पीछे दौड़ने की जरूरत ही न पड़े।
पुलिसिंग का एक खूबसूरत चेहरा...
सड़क पर मवेशियों को हटाते ये जवान शायद देखने में एक छोटी सी तस्वीर लगें... लेकिन इसके पीछे आम आदमी की सुरक्षा की बड़ी सोच छिपी है..... क्राइम के खिलाफ सख्ती... ट्रैफिक को लेकर सजगता... और हादसे से पहले खतरे को पहचानने की कोशिश—यही पुलिस कप्तान भावना पांडे की ग्राउंड पुलिसिंग की तस्वीर बनती दिखाई दे रही है।
और शायद पुलिसिंग की सबसे खूबसूरत तस्वीर यही है...
जब वर्दी सिर्फ कानून का डर दिखाने के लिए नहीं, बल्कि किसी अनजान इंसान की जिंदगी बचाने के लिए सड़क पर उतरती है।






