लाखों रुपये खर्च हुए... बड़े-बड़े दावे किए गए... लेकिन नतीजा क्या निकला ? आमापारा आज भी बारिश में डूब रहा है.... गलियां पानी से लबालब हैं, लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है, और अब सबसे गंभीर आरोप यह है कि घरों के शौचालयों का गंदा पानी भी नाली के जरिए सीधे मकई तालाब में पहुंच रहा है। इससे इलाके में संक्रमण, डेंगू, मलेरिया और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है....
दावे बेनक़ाब
स्थानीय नागरिकों का आरोप है पीडब्ल्यूडी प्रभारी विजय मोटवानी द्वारा लाखों रुपये की लागत से बनाई गई नाली न तो जलभराव रोक सकी और न ही लोगों को राहत दे सकी..... उल्टा, अब वही नाली लोगों के लिए चिंता और आक्रोश का कारण बन गई है।
आखिर लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी आमापारा क्यों डूब रहा है...?
क्या निर्माण में लापरवाही हुई...?
मकई तालाब को प्रदूषित होने से बचाने की जिम्मेदारी किसकी है...?
इन सवालों के जवाब अब आमापारा की जनता नगर निगम प्रशासन से मांग रही है।




