धमतरी जिले में विधवा पेंशन के भुगतान में हो रही भारी देरी अब गरीब और बेसहारा महिलाओं के लिए बड़ी मुसीबत बनती जा रही है..… महीनों से पेंशन राशि नहीं मिलने के कारण वृद्ध और विधवा महिलाओं के सामने रोजमर्रा की जिंदगी चलाना मुश्किल हो गया है.... दवाई, राशन और जरूरी घरेलू खर्चों के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर होना पड़ रहा है..... अपनी इसी पीड़ा और परेशानी को लेकर बड़ी संख्या में महिलाएं मंगलवार को कुरूद विधानसभा के पूर्व विधायक लेखराम साहू के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट पहुंचीं और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई......
कलेक्ट्रेट परिसर में महिलाओं की आंखों में बेबसी साफ दिखाई दे रही थी..... किसी को इलाज के लिए पैसे नहीं मिल रहे हैं तो किसी के घर में राशन की समस्या खड़ी हो गई है..... महिलाओं का कहना था कि सरकार की महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ उन्हें समय पर नहीं मिल रहा, जिससे उनका जीवन संकट में पड़ गया है.... इस दौरान पूर्व विधायक लेखराम साहू ने महिलाओं की आवाज बुलंद करते हुए प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए..... उन्होंने कहा कि जिले में बड़ी संख्या में पात्र विधवा महिलाओं को कई महीनों से पेंशन का भुगतान नहीं हुआ है, जबकि यह राशि उनके जीवनयापन का प्रमुख सहारा है.... उन्होंने कहा कि गरीब, वृद्ध और असहाय महिलाओं को उनके अधिकार से वंचित रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है..... लेखराम साहू ने कलेक्टर से मुलाकात कर महिलाओं की समस्याओं को प्रमुखता से रखा और जल्द से जल्द लंबित पेंशन राशि जारी करने की मांग की...... उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि प्रशासन द्वारा शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो कांग्रेस पार्टी महिलाओं के हित में सड़क पर उतरकर आंदोलन और प्रदर्शन करने से पीछे नहीं हटेगी..... महिलाओं ने भी प्रशासन से मांग की कि लंबित पेंशन राशि का तत्काल भुगतान किया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक संकट से राहत मिल सके.... उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में पेंशन ही उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा है और इसके बिना घर चलाना बेहद कठिन हो गया है..... वहीं प्रशासन की ओर से प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया गया कि मामले की जांच कर पात्र हितग्राहियों को जल्द से जल्द पेंशन का लाभ दिलाने की कार्रवाई की जाएगी..... प्रशासन के आश्वासन के बाद महिलाओं ने उम्मीद जताई कि उनकी वर्षों पुरानी नहीं बल्कि महीनों से चली आ रही इस गंभीर समस्या का जल्द समाधान होगा..... फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन विधवा महिलाओं के लिए पेंशन जीवन का सहारा है, आखिर उन्हें अपनी ही हक की राशि पाने के लिए बार-बार प्रशासन के दरवाजे क्यों खटखटाने पड़ रहे हैं?





