स्वाधीनता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर जारी एक विज्ञापन से शुरू हुआ विवाद अब नगर निगम की सियासत में एक नए और बेहद अहम मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है..... जिस विज्ञापन में भाजपा के पार्षदों की तस्वीरें बाकायदा शामिल थीं, लेकिन मेयर की तस्वीर गायब थी, उस मामले को लेकर हमने भी प्रमुखता से सवाल उठाए थे.... तब सवाल था—मेयर की तस्वीर आखिर किसने हटाई ?
अब वक्त बदला है… और निगम के भीतर एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है..... एमआईसी सदस्य नीलेश लुनिया को एमआईसी से ही बाहर कर दिया गया है..... सिर्फ इतना ही नहीं, उनसे जुड़ा प्रभार भी वापस ले लिया गया और बठेना वार्ड के पार्षद श्यामलाल नेताम को नई जिम्मेदारी सौंप दी गई है..... आयुक्त के हस्ताक्षर से नई प्रभार सूची जारी होते ही शहर के राजनीतिक चौराहों पर फिर वही सवाल लौट आया है—क्या विज्ञापन विवाद की कहानी यहीं खत्म हुई थी… या उसका कोई अध्याय अब सामने आ रहा है ? फिलहाल दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है..... लेकिन राजनीतिक गलियारों में इन दोनों घटनाक्रमों को जोड़कर देखे जाने की चर्चा जरूर तेज हो गई है..... क्योंकि याद कीजिए..... स्वाधीनता दिवस के विज्ञापन में मेयर की तस्वीर गायब, जबकि भाजपा पार्षदों की तस्वीरें मौजूद.... विवाद बढ़ा तो संगठन ने पार्षदों की बैठक बुलाई। वन-टू-वन बातचीत हुई। किसकी क्या भूमिका थी, किसे क्या जानकारी थी और विज्ञापन का अंतिम स्वरूप कैसे तैयार हुआ—इन सवालों पर अंदरखाने मंथन की चर्चा सामने आई..... मामला इतना गरमाया बात थाने तक ले जाने की चर्चा भी सामने आई.... फिर कहा गया— घर की बात है… घर में ही रहने दो लेकिन अब सवाल यह है क्या घर की बात सचमुच घर में ही रह गई ? क्योंकि इसके बाद निगम की सियासत में एक ऐसा फैसला सामने आया, जिसने चर्चाओं को और हवा दे दी....
नीलेश लुनिया एमआईसी से बाहर… क्यों ?
आयुक्त के हस्ताक्षर से जारी नई सूची के बाद नीलेश लुनिया की एमआईसी सदस्यता समाप्त कर दी गई है, जबकि उनका प्रभार श्यामलाल नेताम को सौंपा गया है.....
यहीं से सवालों की दूसरी कड़ी शुरू होती है— क्या यह सामान्य संगठनात्मक फेरबदल है ? क्या कोई प्रशासनिक वजह है ? क्या विज्ञापन विवाद का कहीं कोई साया इस फैसले तक पहुंचा ? या फिर कहानी के पीछे कोई ऐसा कारण है, जो फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया जा रहा ?
... और सबसे बड़ा सवाल— अगर विज्ञापन ही वजह थी तो फिर अकेले नीलेश लुनिया ही क्यों ? अगर विवादित विज्ञापन में कई लोगों की भूमिका या सहमति की चर्चा थी, तो फिर कार्रवाई का दायरा एक व्यक्ति तक ही क्यों सिमटा ? जिस मामले में दूसरे सदस्य भी चर्चा में आए, उन्हें क्यों बख्शा गया ? क्या निगम की सियासत में मां और मौसी वाला रुख अपनाया गया—किसी पर सख्ती, किसी पर नरमी ? या फिर नीलेश लुनिया को एमआईसी से हटाने की वजह विज्ञापन से बिल्कुल अलग है ?
यही वह सवाल है, जिसका जवाब फिलहाल सबसे ज्यादा तलाशा जा रहा है....
रायपुर की ओर बार-बार रुख… क्या इसका भी कोई कनेक्शन ?
चौराहों पर एक और चर्चा है—बार-बार रायपुर की ओर होने वाली दौड़-भाग..... क्या ऊपर तक कोई शिकायत पहुंची थी ? क्या संगठन के भीतर कोई नाराजगी थी ? क्या किसी घटनाक्रम को लेकर लगातार रिपोर्टिंग हो रही थी ? या फिर यह सब सिर्फ राजनीतिक कयास है ?
फिलहाल आधिकारिक तौर पर तस्वीर साफ नहीं है..... लेकिन इतना जरूर है एक विज्ञापन से गायब हुई मेयर की तस्वीर ने जो सवाल खड़े किए थे, वे अब महज तस्वीर तक सीमित नहीं रह गए हैं.... विज्ञापन से शुरू हुई चर्चा… संगठन की बैठक तक पहुंची.... बैठक से सवाल उठे… और अब एमआईसी में बदलाव हो गया
यही वजह है शहर में फिर एक पुरानी पंक्ति गूंजती सुनाई दे रही है—
लागा चुनरी में दाग… छुपाऊं कैसे,
अपनों से नजरें मिलाऊं कैसे
हालांकि यह अभी साफ नहीं है नीलेश लुनिया को एमआईसी से हटाने का फैसला उसी विवाद की कड़ी है या महज एक संयोग..... लेकिन राजनीतिक चर्चा में दोनों घटनाक्रमों का साथ-साथ आना अपने आप में दिलचस्प जरूर है।
अब असली सवाल—किसने हटाई मेयर की तस्वीर ? और नीलेश क्यों हटे ?
एक तरफ सवाल अब भी कायम है — मेयर की तस्वीर विज्ञापन से किसने हटाई ?
दूसरी तरफ नया सवाल खड़ा हो गया है — नीलेश लुनिया को एमआईसी से ही बाहर करने की असली वजह क्या है ? अगर यह सिर्फ प्रशासनिक फेरबदल है तो वजह सामने क्यों नही ? अगर यह संगठनात्मक फैसला है तो इसके पीछे का आधार क्या ? और अगर विज्ञापन विवाद का कोई कनेक्शन है, तो फिर कार्रवाई का पैमाना सबके लिए एक जैसा क्यों नही ? चौराहों पर चर्चा जमकर है… सवाल लगातार बढ़ रहे हैं… लेकिन जवाब अभी भी अधूरे हैं..... तस्वीर एक विज्ञापन से गायब हुई थी.... अब निगम की एमआईसी की एक तस्वीर ही बदल गई है.... सवाल यह नहीं कि कौन आया और कौन गया… सवाल यह है — क्या यह महज एक प्रभार परिवर्तन है… या उस कहानी का अगला पन्ना, जिसकी शुरुआत मेयर की गायब तस्वीर से हुई थी ?
कहानी अभी बाकी है… पर्दा पूरी तरह उठा नहीं है।






