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आयुष्मान के भरोसे अस्पताल पहुंचा मरीज... इलाज के बाद उठा डबल वसूली का सवाल! शिवनंदा हॉस्पिटल पर गंभीर आरोप


हाथ में आयुष्मान कार्ड था... दिल में भरोसा था कि सरकार की योजना मुश्किल वक्त में सहारा बनेगी... टूटी हड्डी का दर्द लेकर एक मरीज निजी अस्पताल पहुंचा तो कथित तौर पर उसे भी यही भरोसा दिलाया गया—इलाज आयुष्मान से कैशलेस होगा, जेब से एक रुपया नहीं लगेगा..... मगर मरीज का आरोप है इलाज आगे बढ़ा तो कहानी ही बदल गई...... आयुष्मान कार्ड से करीब 66 हजार रुपये की राशि लेने के बाद भी दवा, जांच और दूसरे खर्चों के नाम पर करीब 60 हजार रुपये नकद लिए गए.....

यानी जिस इलाज को कैशलेस बताए जाने का दावा किया गया था, उसी इलाज में कार्ड के साथ मरीज की जेब पर भी बोझ पड़ने का आरोप है.... अब पीड़ित ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर शिकायत की है और मामला प्रशासन के सामने आने के बाद बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—अगर शिकायत सही पाई जाती है तो आखिर आयुष्मान के नाम पर यह कैसा इलाज और कैसी वसूली ?

मामला धमतरी के शिवनंदा हॉस्पिटल से जुड़ा बताया जा रहा है..... जानकारी के मुताबिक सिविल इंजीनियर हरिश्चंद्र देवांगन हड्डी टूटने के बाद इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे थे..... उनका आरोप है शुरुआत में अस्पताल की ओर से भरोसा दिया गया कि उनका पूरा इलाज आयुष्मान योजना के तहत कैशलेस हो जाएगा और उन्हें अलग से रकम खर्च नहीं करनी पड़ेगी..... पीड़ित के मुताबिक इसी भरोसे पर उन्होंने अस्पताल में इलाज शुरू कराया..... लेकिन इसके बाद कथित तौर पर आयुष्मान कार्ड से करीब 66 हजार रुपये की राशि ली गई...… आरोप है बात यहीं खत्म नहीं हुई...... इलाज के दौरान कभी दवाइयों तो कभी जांच और अन्य जरूरतों के नाम पर उनसे अलग-अलग समय में रकम मांगी गई और इस तरह करीब 60 हजार रुपये नकद भी खर्च हुए...... पीड़ित का सवाल है जब उन्हें शुरुआत में इलाज आयुष्मान योजना के तहत होने का भरोसा दिया गया था, तो कार्ड से राशि लेने के बाद इतनी बड़ी नकद रकम आखिर क्यों ली गई ? इसी सवाल और अपने आरोपों के साथ उन्होंने मामले की शिकायत कलेक्टर कार्यालय में की है।

अब प्रशासन की जांच पर टिकी निगाहें

मामला सामने आने के बाद अब निगाहें प्रशासन की जांच पर हैं..… जानकारी के मुताबिक धमतरी कलेक्टर ने मामले का संज्ञान लिया है और जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की बात कही गई है..... ऐसे में जांच से यह साफ होना जरूरी होगा कि आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल ने किन सेवाओं का क्लेम किया, मरीज से नकद राशि किन मदों में ली गई और क्या यह वसूली योजना के नियमों के अनुरूप थी...... इस मामले ने इसलिए भी सवाल खड़े किए हैं क्योंकि अस्पताल को लेकर पहले भी विवाद और आरोप सामने आने की बातें कही जा रही हैं..... हालांकि पूर्व के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस शिकायत से नहीं होती, इसलिए मौजूदा मामले में प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष बेहद अहम होंगे।

अस्पताल का पक्ष जानने की कोशिश, फोन नहीं हुआ रिसीव

खबर में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानना भी जरूरी था। इसी सिलसिले में शिवनंदा हॉस्पिटल के डॉक्टर विभोर नंदा से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ...... अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना उचित होगा..... अब सवाल सिर्फ एक मरीज के करीब 1 लाख 26 हजार के कथित खर्च का नहीं है...... सवाल उस भरोसे का भी है, जिसके सहारे जरूरतमंद मरीज आयुष्मान कार्ड लेकर अस्पताल की चौखट तक पहुंचता है..... सरकार की योजना का मकसद इलाज के भारी आर्थिक बोझ से राहत देना है, लेकिन यदि जांच में मरीज के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला योजना के क्रियान्वयन और निजी अस्पतालों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करेगा..... फिलहाल शिकायत कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच चुकी है... जांच की बारी प्रशासन की है..... अब देखना होगा दस्तावेज क्या कहानी कहते हैं—मरीज के आरोपों में कितना दम है और अस्पताल की तरफ से क्या जवाब सामने आता है..... सवाल कायम है—क्या इस शिकायत पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर मामला कागजी जांच के पन्नों में सिमट जाएगा ?

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