धमतरी, छत्तीसगढ़ — कभी-कभी ज़िन्दगी यूँ ही अचानक सवाल बन जाती है… और जवाब देने से पहले ख़ामोश हो जाती है.... ऐसी ही एक दर्दनाक, दिल को झकझोर देने वाली वारदात ने रविवार की शाम पूरे धमतरी शहर को सन्न कर दिया..... सुभाष नगर वार्ड की 17 साल की नाबालिग लड़की रानी उर्फ़ रागिनी श्रीवास्तव ने वो कदम उठा लिया, जिसे सुनकर हर आंख नम है, हर दिल सहमा हुआ है...... बताया जा रहा है कि शाम के क़रीब, जब मोहल्ले में रोज़ की तरह बच्चों की हंसी-ठिठोली गूंज रही थी, अचानक रागिनी चुप-चाप 50 फीट ऊँची पानी की टंकी पर चढ़ गई..... किसी ने सोचा भी नहीं था कि कुछ पलों बाद वो मासूम ज़िन्दगी यूँ हवा में झूलते हुए ज़मीन पर आ गिरेगी। देखते ही देखते उसने छलांग लगा दी… और उस एक छलांग ने सब कुछ बदल दिया..... गिरने की आवाज़ के साथ पूरा इलाका दहशत में आ गया। लोग भागकर पहुंचे, कोई उसे आवाज़ दे रहा था, कोई फ़ोन मिलाने की कोशिश में था। पर जब तक उसे जिला अस्पताल धमतरी पहुँचाया गया — डॉक्टरों ने सिर हिलाकर सिर्फ़ इतना कहा, अब कुछ नहीं बचा...... उस पल पूरे वार्ड में सन्नाटा छा गया, मानो वक़्त भी रुक गया हो..... पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है..... शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और परिजनों से पूछताछ जारी है.... लेकिन सवाल वही है जो हर किसी के दिल में उठ रहा है — आख़िर 17 साल की इस नाज़ुक उम्र में ऐसा क्या हुआ, जो रागिनी ने ज़िन्दगी से हार मान ली ?लोग कह रहे हैं, वो बहुत शांत स्वभाव की थी, हमेशा मुस्कुराती रहती थी… फिर अचानक ये खामोशी क्यों? कहीं कोई दर्द तो नहीं था जो उसने कभी ज़ाहिर नहीं किया ? यह घटना सिर्फ़ एक घर की नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सख़्त आईना है — जहाँ दिखता है कि तनाव, अवसाद और अकेलापन किस तरह हमारे बच्चों की मासूमियत को निगल रहा है। रागिनी की मौत ने एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया है — क्या हम अपने बच्चों की मुस्कान के पीछे छिपे दर्द को सच-मुच समझ पा रहे हैं?
ज़िन्दगी बहुत क़ीमती है, लेकिन कभी-कभी यही ज़िन्दगी चुपके से टूट जाती है... और पीछे छोड़ जाती है सिर्फ़ सवाल, सन्नाटा, और कुछ अधूरे सपने...





