धमतरी-सिहावा मार्ग पर केरेगांव के पास गट्टासिली मोड़ में हुआ फायर ब्रिगेड हादसा अब सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही, नियमों की अनदेखी और जानलेवा रिस्क का बड़ा मामला बनता जा रहा है..... नगर पंचायत नगरी की फायर ब्रिगेड गाड़ी हादसे का शिकार हुई और चालक राजू साहू की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई..... लेकिन इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर फायर ब्रिगेड जैसी हाई-रिस्क और स्पेशल ट्रेनिंग वाली गाड़ी को ट्रैक्टर चलाने वाले ड्रायवर के भरोसे क्यों छोड़ा गया था…? जानकार बताते हैं कि फायर ब्रिगेड वाहन चलाने के लिए सिर्फ भारी वाहन लाइसेंस ही नहीं, बल्कि विशेष प्रशिक्षण और तकनीकी समझ भी जरूरी होती है..... ऐसे में यदि बिना स्पेशल ट्रेनिंग वाले व्यक्ति से दमकल वाहन चलवाया जा रहा था, तो यह सीधे तौर पर नियम-कायदों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
गट्टासिली मोड़ में मचा चीख-पुकार का मंजर
सोमवार को नगर पंचायत नगरी की फायर ब्रिगेड गाड़ी धमतरी से वापस नगरी लौट रही थी...... इसी दौरान केरेगांव के पास गट्टासिली मोड़ में तेज रफ्तार दमकल वाहन अचानक अनियंत्रित हो गया और सड़क किनारे खड़ी क्रूजर वाहन से जोरदार टक्कर हो गई..... टक्कर इतनी भयानक थी कि फायर ब्रिगेड वाहन सीधे क्रूजर के ऊपर चढ़ गया..... हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई..... दुर्घटना में चालक राजू साहू की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कंडक्टर गंभीर रूप से घायल हो गया..... घायल को तत्काल अस्पताल भेजा गया, जहां उसका इलाज जारी है..... प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक मोड़ में वाहन की स्पीड काफी तेज थी और अचानक कंट्रोल बिगड़ते ही बड़ा हादसा हो गया।
फायर ब्रिगेड चलाने के अलग नियम, फिर कैसे दी गई जिम्मेदारी?
फायर ब्रिगेड कोई सामान्य वाहन नहीं माना जाता। एक्सपर्ट्स के अनुसार दमकल वाहनों में भारी पानी टैंक, हाई प्रेशर सिस्टम और इमरजेंसी रिस्पॉन्स तकनीक होती है...... इन्हें चलाने वाले ड्रायवर को विशेष ट्रेनिंग दी जाती है ताकि मोड़, तेज रफ्तार और आपातकालीन हालात में वाहन संतुलित रहे.... ऐसे में अब सवाल खड़ा हो रहा है कि यदि वाहन मूल रूप से ट्रैक्टर चलाने वाले ड्रायवर से चलवाया जा रहा था, तो क्या विभाग ने सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज किया…?
क्या चालक को पर्याप्त ट्रेनिंग दी गई थी…?
क्या नगर पंचायत प्रशासन ने रिस्क को हल्के में लिया…?
जान गई… अब जवाब कौन देगा?
हादसे के बाद इलाके में गुस्सा और चर्चा दोनों तेज हैं.... लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर स्पेशल ट्रेनिंग प्राप्त चालक होता तो शायद हादसा टल सकता था...... अब पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ रही है.... स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी विभागों में कई बार नियमों को ताक पर रखकर काम कराया जाता है और उसकी कीमत किसी कर्मचारी को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है.... सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया..... फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है..... वहीं अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह मामला सिर्फ सड़क हादसा मानकर दब जाएगा, या फिर लापरवाही और नियम उल्लंघन की भी जांच होगी।





