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सड़कों से आगे बढ़ा निगम का कारवां… अब धमतरी की आस्था और संस्कृति की भी होगी पहरेदारी!

 

शहर में विकास की रफ्तार बढ़ाने की कवायद के बीच नगर निगम ने अब एक ऐसा फैसला लिया है, जिसकी चर्चा सड़क और नाली से कहीं आगे… धमतरी की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकजुटता तक पहुंच रही है..... वर्षों से शहर के लोग और सामाजिक समितियां अपने दम पर जिन धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्वों को भव्यता देती रही हैं, अब उन आयोजनों में नगर निगम भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने जा रहा है...... निगम ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मटका फोड़ प्रतियोगिता और गणेशोत्सव में झांकी एवं स्थल सजावट प्रतियोगिता आयोजित करने को मंजूरी दे दी है...... मतलब — अब नगर निगम की जिम्मेदारी सिर्फ सड़क, नाली, पानी, सफाई और निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शहर की सांस्कृतिक विरासत और उत्सवी परंपराओं को संवारने की जिम्मेदारी भी निगम अपने कंधों पर उठाएगा..... और शायद इस फैसले की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है देर हुई… मगर शहर की धड़कन को समझने की शुरुआत तो हुई।

जिस शहर ने अपने दम पर उत्सव सजाए… अब उसके साथ निगम भी खड़ा होगा

धमतरी में जन्माष्टमी का उत्साह हो या गणेशोत्सव की रौनक—हर साल शहर के अलग-अलग वार्डों में युवा, सामाजिक संगठन और उत्सव समितियां अपनी मेहनत से त्योहारों को यादगार बनाती रही हैं...... कहीं मटकी फोड़ने को लेकर युवाओं का जोश दिखाई देता है तो कहीं गणेश पंडालों की सजावट देखने लोगों की भीड़ उमड़ती है..... कहीं धार्मिक झांकी आस्था की तस्वीर पेश करती है तो कहीं सामाजिक संदेश लोगों को सोचने पर मजबूर कर देता है..... अब तक यह सब मुख्य रूप से समितियों और संगठनों की मेहनत पर टिका रहा।

अब तस्वीर बदलने वाली है।

नगर निगम ने इन आयोजनों को प्रोत्साहन देने का फैसला लेकर यह संदेश दिया है कि शहर की संस्कृति केवल समाज और समितियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि शहरी व्यवस्था का भी एक अहम हिस्सा है।

देर से आया फैसला… लेकिन खुशी बड़ी है

शहरवासियों के लिए यह फैसला इसलिए भी खास है क्योंकि लंबे समय से धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में नगर निगम की व्यापक सहभागिता की उम्मीद की जाती रही है..... अब जब निगम ने पहल की है तो इसे लेकर लोगों में खुशी स्वाभाविक है..... लोगों की जुबां पर एक बात साफ सुनाई दे रही है—

देर हुई तो क्या हुआ… कम से कम निगम ने अपनी जिम्मेदारी का जिम्मा तो लिया।

क्योंकि शहर सिर्फ इमारतों का नाम नहीं होता।
शहर उसकी गलियों में गूंजती आरती है…
त्योहारों में उमड़ती भीड़ है…
मटकी फोड़ते युवाओं का जोश है…
गणेश पंडालों में सजी झांकियां हैं…
और सबसे बढ़कर—एक-दूसरे के साथ खड़े होने का जज्बा है।

मटका फूटेगा तो दिखेगा युवाओं का जोश

जन्माष्टमी पर प्रस्तावित मटका फोड़ प्रतियोगिता में शहर के अलग-अलग वार्डों की युवा टीमें हिस्सा ले सकेंगी..... इससे युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलेगा और धार्मिक उत्सव में खेल भावना के साथ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल भी बनेगा...... यह सिर्फ मटका फोड़ने की प्रतियोगिता नहीं होगी, बल्कि युवाओं को सकारात्मक मंच देने की एक कोशिश भी होगी।

गणेशोत्सव में झांकियों की होगी असली परीक्षा

गणेशोत्सव के दौरान झांकी और स्थल सजावट प्रतियोगिता भी खास आकर्षण का केंद्र बन सकती है...... हर साल समितियां अपनी कल्पनाशीलता और मेहनत से अलग-अलग थीम पर पंडाल और झांकियां तैयार करती हैं...... अब जब निगम की ओर से प्रतियोगिता होगी तो समितियों में भी बेहतर से बेहतर करने की होड़ देखने को मिल सकती है।

किसकी झांकी सबसे संदेशपूर्ण होगी?
किसका पंडाल सबसे खूबसूरत होगा?
किसकी सजावट लोगों का दिल जीत लेगी?

इन सवालों के जवाब गणेशोत्सव के दौरान शहर को देखने मिलेंगे..... स्वच्छता, रचनात्मकता, आकर्षक सजावट, धार्मिक भावना और सामाजिक संदेश जैसे पहलुओं को भी मूल्यांकन का आधार बनाया जा सकता है।

मेयर —विकास सिर्फ कंक्रीट से नहीं होता

मेयर रामू रोहरा का कहना है नगर निगम की जिम्मेदारी केवल सड़क, नाली, पानी और सफाई तक सीमित नहीं है...... शहर की सांस्कृतिक पहचान, धार्मिक परंपराओं और सामाजिक एकता को मजबूत करना भी जरूरी है..... उनका कहना है श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गणेशोत्सव जैसे पर्व समाज को जोड़ने का काम करते हैं....... इसलिए इन आयोजनों में नगर निगम की सहभागिता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है..... उनके मुताबिक— धमतरी का विकास केवल सड़कों और भवनों से नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता से भी होता है।

अब सवाल सिर्फ आयोजन का नहीं… नई सोच का है

नगर निगम की यह पहल फिलहाल दो प्रमुख पर्वों से शुरू हो रही है, लेकिन इसके आगे बढ़ने की संभावनाएं भी हैं..... धमतरी में वर्षभर अलग-अलग समाजों और संगठनों की ओर से धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजन होते हैं..... अगर यह पहल आगे भी जारी रही तो आने वाले समय में निगम की भूमिका केवल व्यवस्थाओं तक सीमित न रहकर शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों को दिशा और मंच देने वाली संस्था के रूप में भी दिखाई दे सकती है...... और शायद यही इस पूरे फैसले का सबसे अहम पहलू है..... धमतरी को सिर्फ विकसित शहर बनाना काफी नहीं… उसे अपनी मिट्टी, अपनी परंपरा और अपनी तहजीब से भी जोड़े रखना जरूरी है।

निगम ने देर से ही सही, लेकिन इस दिशा में कदम बढ़ाया है..... और इन सबके बीच पहली बार शहर यह भी महसूस करेगा —

उत्सव हमारा है… और अब जिम्मेदारी में निगम भी हमारे साथ है।



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