वर्षों का इंतजार... हाईकोर्ट का आदेश... और फिर करीब छह साल की लंबी खामोशी! आखिर डूब प्रभावित परिवारों के सब्र का बांध टूट गया..... अपने हक और जमीन की मांग को लेकर प्रभावितों ने 12 अक्टूबर 2026 से बरदीहा लेक व्यू रिसोर्ट के पीछे अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है..... आंदोलनकारियों का इल्जाम है छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पात्र परिवारों की जांच और भूमि आवंटन को लेकर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई..... अब प्रभावित दो टूक कह रहे हैं—आश्वासन बहुत सुन लिए, अब फैसला जमीन पर दिखाई देना चाहिए..... मामला WPC No. 5575/2008 और WPC No. 3055/2016 से जुड़ा है, जिनमें हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2020 को आदेश दिया था...... आंदोलनकारियों का सवाल है जब अदालत का आदेश मौजूद है तो करीब छह साल बाद भी पात्र परिवार अपने हक के इंतजार में क्यों हैं ?
इंतजार खत्म, अब आंदोलन!
बांध के कारण प्रभावित परिवार लंबे अरसे से भूमि और अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं..... उनका कहना है हर बार उम्मीद जगी, मगर स्थायी हल सामने नहीं आया..... अब यही नाराज़गी अनिश्चितकालीन आंदोलन में तब्दील हो गई है..... समिति की मांग स्पष्ट है—हाईकोर्ट के आदेश का पालन हो, पात्र डूब प्रभावितों की जांच पूरी हो और नियमानुसार भूमि आवंटन की कार्रवाई तत्काल आगे बढ़े...... आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है जल सत्याग्रह और धरना शांतिपूर्ण व लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा...... शासन-प्रशासन की तरफ से जब तक समाधान की ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होती, आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा।
अब प्रशासन की बारी!
डूब प्रभावित मैदान में उतर चुके हैं..... धरना शुरू हो चुका है.... मांग सामने है और अदालत के आदेश का हवाला भी दिया जा रहा है....
अब सबसे बड़ा सवाल—क्या प्रशासन वर्षों पुरानी इस लड़ाई का हल निकालेगा ?
क्या पात्र परिवारों को जमीन मिलेगी ?
या एक बार फिर मामला आश्वासनों में उलझ जायेगा?
बरदीहा में शुरू हुआ यह आंदोलन अब किस मोड़ पर पहुंचेगा—नजर प्रशासन के अगले कदम पर है।





