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निकाला गया कर्मी... फिर किसके इशारे पर वापसी की तैयारी? फर्जी बिलों से लेकर सप्लाई के खेल तक लगे थे गंभीर आरोप, फिर आखिर क्यों मेहरबान हो रहे हैं कुछ जिम्मेदार चेहरे?


धमतरी नगर निगम एक बार फिर सवालों के घेरे में खड़ा दिखाई दे रहा है.... बीते कुछ महीनों से निगम के भीतर विवादों, नाराज़गियों और फैसलों को लेकर लगातार चर्चाओं का बाज़ार गर्म है...... कभी एमआईसी सदस्यों की नाराज़गी सुर्खियां बनती है, कभी चौक-चौराहों में अपने ही नेताओं के खिलाफ गाली-गलौज की चर्चाएं सामने आती हैं, तो कभी नोटिसों के जरिए आम लोगों से वसूली जैसे आरोप हवा पकड़ लेते हैं.... लेकिन इस बार जो मामला सामने आया है, उसने निगम के भीतर और बाहर दोनों जगह हलचल मचा दी है..... सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ माह पूर्व निगम प्रशासन ने एक ऐसे कर्मी के खिलाफ कार्रवाई की थी जिस पर फर्जी बिल तैयार कराने, कम सामग्री देकर अधिक राशि का बिल प्रस्तुत करने, सप्लाई में गड़बड़ी और आर्थिक अनियमितताओं जैसी गंभीर शिकायतें सामने आई थीं..... शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कर्मी को कार्य से पृथक कर दिया गया था.... मगर अब कहानी में एक नया मोड़ आ गया है.... चर्चा है कि जिस व्यक्ति को शिकायतों और जांच के बाद बाहर का रास्ता दिखाया गया था, उसी की निगम में दोबारा एंट्री कराने की कवायद शुरू हो गई है..... सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी या दिलचस्पी है, जिसके चलते हटाए गए व्यक्ति को फिर से निगम के दरवाजे खोलने की कोशिश की जा रही है ?

अति विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि एक एमआईसी प्रभारी इस कर्मी की वापसी के लिए विशेष रुचि दिखा रहे हैं...... वहीं एक वरिष्ठ अधिकारी का नाम भी चर्चाओं में है, जिन पर इस कथित ठेकेदार-कर्मी को फिर से व्यवस्था में शामिल कराने की कोशिशों का आरोप लगाया जा रहा है.....

यहीं से सवाल और भी गंभीर हो जाते हैं_____ बताया जाता है कि संबंधित व्यक्ति निगम के एक बेहद महत्वपूर्ण विभाग में बैठता था और विभागीय प्रक्रियाओं, खरीद-बिक्री, सप्लाई और भुगतान से जुड़ी कई अहम जानकारियों तक उसकी पहुंच थी..... आरोप तो यहां तक हैं कि दूसरे लोगों के नाम पर सामग्री सप्लाई दिखाकर मनमाने बिल तैयार करवाए जाते थे और बाद में भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराई जाती थी..... यदि इन आरोपों के कारण उसे हटाया गया था, तो फिर अचानक उसकी वापसी की ज़रूरत क्यों महसूस होने लगी ? क्या जांच पूरी तरह समाप्त हो चुकी है ? क्या उसे क्लीन चिट मिल चुकी है ? या फिर निगम की फाइलों में ऐसे कई राज़ दफन हैं, जिन्हें बाहर आने से रोकने के लिए यह पूरी कवायद की जा रही है ? निगम की गलियारों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि संबंधित व्यक्ति के कार्यकाल से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फाइलें और जानकारियां आज भी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं हो पाई हैं...... ऐसे में उसकी संभावित वापसी को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं...... सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस व्यक्ति को कभी शिकायतों के आधार पर हटाना जरूरी समझा गया था, आज उसे वापस लाने की इतनी बेचैनी आखिर किस बात की है ? क्या यह महज एक प्रशासनिक फैसला है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा खेल छिपा हुआ है ?..... पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करने वाले निगम प्रशासन के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि यदि किसी हटाए गए कर्मी को पुनः नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है, तो उसके पीछे के कारणों को सार्वजनिक किया जाए...... क्योंकि सवाल सिर्फ एक कर्मचारी की वापसी का नहीं, बल्कि निगम की साख, प्रशासनिक निष्पक्षता और जनता के विश्वास का भी है.....

फिलहाल निगम की गलियारों में एक ही चर्चा तैर रही है—

जिसे कल तक बाहर का रास्ता दिखाया गया था, उसे आज वापस लाने की इतनी जल्दबाजी आखिर क्यों ? इस सवाल का जवाब शायद आने वाले दिनों में कई और परतें खोल सकता है।



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