तारीख 25 सितंबर की... तैयारी भी उसी दिन की... फिर 24 सितंबर को ही नारियल फूट गया! पूजा हुई, विकास कार्यों की आधारशिला रखी गई और भूमिपूजन की तस्वीरें भी सामने आ गईं..... लेकिन कार्यक्रम खत्म होने के साथ एक सवाल शहर की फिज़ा में तैरने लगा—जब नगर निगम की ओर से भूमिपूजन के लिए 25 सितंबर की तारीख पहले से निर्धारित बताई जा रही थी, तो फिर 24 सितंबर को ही ऐसी क्या जल्दी थी ? मामला नगर पालिक निगम धमतरी की सभापति और वार्ड पार्षद कौशिल्या देवांगन के वार्ड में प्रस्तावित विभिन्न निर्माण कार्यों के भूमिपूजन से जुड़ा है.... बताया जा रहा है नगर निगम द्वारा कार्यक्रम के लिए 25 सितंबर शुक्रवार की तारीख निर्धारित की गई थी..... कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पार्षदों और लोगों से अपील भी की जा रही थी.... लेकिन तय तारीख आने से पहले ही तस्वीर बदल गई.... एक दिन पहले यानी 24 सितंबर को ही भूमिपूजन करा दिया गया.... कार्यक्रम में प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक रंजना डीपेन्द्र साहू और सभापति कौशिल्या देवांगन मौजूद रहीं तथा संबंधित वार्ड में प्रस्तावित निर्माण कार्यों की आधारशिला रखी गई।
महापौर नहीं... लोकनिर्माण अध्यक्ष नहीं... निगम के अधिकारी-कर्मचारी भी नजर नहीं आए!
यहीं से इस भूमिपूजन की कहानी और दिलचस्प हो जाती है.... एक दिन पहले हुए कार्यक्रम में मेयर रामू रोहरा और लोकनिर्माण विभाग के अध्यक्ष विजय मोटवानी मौजूद नहीं थे.... इतना ही नहीं, नगर निगम के संबंधित अधिकारी और कर्मचारी भी कार्यक्रम में नजर नहीं आए..... अब सवाल सिर्फ दो जनप्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी का नहीं रहा.... जब विकास कार्य नगर निगम से जुड़े हैं तो निगम के अधिकारी-कर्मचारी भी कार्यक्रम में क्यों मौजूद नहीं थे ? क्या उन्हें 24 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम की जानकारी थी ? यदि कार्यक्रम की तारीख बदली गई थी तो इसकी सूचना संबंधित लोगों तक पहुंची थी या नहीं ? इन सवालों पर फिलहाल स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
आयुक्त से पूछा तो जवाब ने बढ़ाई उत्सुकता
मामले को लेकर जब निगम आयुक्त अरुण वर्मा से बात की गई तो उनका कहना था सभापति मैडम के वार्ड में इसी हफ्ते भूमिपूजन होना था.... भूमिपूजन के कार्यक्रम होते रहते हैं, निगम इस बारे में स्पष्ट जानकारी दे पाएगा..... लेकिन निर्धारित तारीख से एक दिन पहले भूमिपूजन होने के सवाल पर आयुक्त ने कहा भूमिपूजन एक दिन पहले कर दिए जाने की जानकारी उन्हें नहीं है और वे इसकी जानकारी लेते हैं..... अब आयुक्त के इस जवाब के बाद सवालों की फेहरिस्त कुछ और लंबी हो गई है..….
25 सितंबर की निर्धारित तारीख 24 सितंबर कैसे हुई ?
तारीख बदलने का फैसला कब और किस स्तर पर हुआ ?
क्या महापौर और लोकनिर्माण अध्यक्ष को इसकी सूचना थी ?
क्या निगम के संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों तक बदली तारीख की जानकारी पहुंची थी ?
और आखिर एक दिन पहले भूमिपूजन कराने की जरूरत क्यों पड़ी ?
हालांकि इन परिस्थितियों से किसी सियासी खींचतान अथवा अंदरूनी नाराज़गी का निष्कर्ष निकालना फिलहाल जल्दबाजी होगी..... महापौर, लोकनिर्माण अध्यक्ष और निगम अधिकारी-कर्मचारियों की गैरमौजूदगी की वास्तविक वजह भी संबंधित पक्षों की आधिकारिक जानकारी के बाद ही स्पष्ट होगी।
विकास कार्य अपनी जगह... मगर चर्चा में आया एक दिन
वार्ड में विकास कार्यों की शुरुआत स्थानीय लोगों के लिए महत्वपूर्ण है..... लेकिन इस बार निर्माण कार्यों के साथ-साथ भूमिपूजन की तारीख और कार्यक्रम में निगम से जुड़े प्रमुख लोगों की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई है.... शहर में अलग-अलग चर्चाएं जरूर हैं, मगर उन चर्चाओं को हकीकत मानने से पहले आधिकारिक जवाब जरूरी है.... फिलहाल नारियल फूट चुका है... पूजा हो चुकी है... आधारशिला रख दी गई है...
मगर सवाल वहीं खड़ा है—
जब तारीख 25 की तय थी... तो 24 को ही क्यों ?
महापौर नहीं, लोकनिर्माण अध्यक्ष नहीं, निगम के अधिकारी-कर्मचारी भी नहीं... और आयुक्त को भी एक दिन पहले भूमिपूजन की जानकारी नहीं—आखिर इस एक दिन की पूरी कहानी क्या है ?
भूमिपूजन की रस्म पूरी हो गई... मगर इसके पीछे उठे सवालों का जवाब अभी बाकी है।




