आधी रात का वक्त... सड़क पर पसरा सन्नाटा... गोद में गहरी नींद में सोया मासूम बच्चा... पति-पत्नी अपने घर लौटने की जल्दी में थे..... परिवार धमतरी में रात 9 बजे से 1 बजे वाला सिनेमा शो देखकर वापस आमदी लौट रहा था। लेकिन पोटियाडीह ओवरब्रिज के पास जो कुछ हुआ, उसने सिर्फ उस परिवार को ही नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं......
परिवार का आरोप है कि रास्ते में उनकी बाइक को रोका गया, गाड़ी की चाबी निकाल ली गई और उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी...... सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रदेश की पुलिस को ऐसा कोई लिखित या मौखिक निर्देश दिया गया है कि आधी रात को अपने परिवार के साथ घर लौट रहे लोगों को बीच सड़क पर रोककर इस तरह की कार्रवाई की जाए ? घटना को लेकर सामने आए वीडियो को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है..... आरोप है कि वीडियो में वर्दीधारी अधिकारी युवक के साथ अभद्र व्यवहार करते और उसका चेहरा पकड़कर मरोड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं..... यदि यह आरोप सही हैं, तो यह दृश्य कई लोगों को झकझोर देने वाला है..... लोग पूछ रहे हैं कि यदि किसी आम नागरिक से पुलिसकर्मी के साथ हाथापाई हो जाए तो तत्काल शासकीय कार्य में बाधा और अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई हो जाती है..... लेकिन जब आरोप स्वयं वर्दी पर लग रहे हों, तब जवाबदेही कौन तय करेगा ? क्या कानून का तराजू दोनों पक्षों के लिए बराबर है ? घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल गर्म है.... नागरिकों का कहना है कि सुरक्षा और जांच पुलिस का अधिकार है, लेकिन क्या उस अधिकार के प्रयोग में संवेदनशीलता, संयम और मानवीय व्यवहार की भी उतनी ही आवश्यकता नहीं है ? खासकर तब, जब सामने एक परिवार और गोद में एक मासूम बच्चा मौजूद हो.... फिलहाल पूरे मामले को लेकर कई सवाल हवा में तैर रहे हैं.... क्या वास्तव में परिवार के साथ अभद्रता हुई ? क्या वाहन रोकने और चाबी निकालने की कोई वैधानिक वजह थी ? क्या पुलिस की कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी ? और सबसे बड़ा सवाल—आधी रात सड़क पर आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक परिवार खुद को अपमानित और परेशान महसूस कर रहा है ? अब सभी की निगाहें पुलिस विभाग के जवाब और संभावित जांच पर टिकी हैं.... क्योंकि मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि जनता और वर्दी के बीच भरोसे का भी है।





